Nana Patekar Cricket Connection: नाना पाटेकर का क्रिकेट से गहरा नाता था। वह बचपन में मुंबई के शिवाजी पार्क में क्रिकेट खेलते थे। फिर उन्होंने क्रिकेट क्यों छोड़ा और कैसे थिएटर से होते हुए भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता बने।
Nana Patekar Death: नाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के उन शानदार कलाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग, प्रभावशाली आवाज और अलग अंदाज से करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। 8 अक्टूबर 2026 को 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों को गहरा सदमा पहुंचा। नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी जिंदगी से जुड़े कई किस्से एक बार फिर चर्चा में हैं। इन्हीं में से एक है उनका क्रिकेट से जुड़ाव। बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले नाना पाटेकर को क्रिकेट से बेहद लगाव था। वह बचपन में क्रिकेट खेला करते थे और मुंबई के मशहूर शिवाजी पार्क में भी जाते थे।
बचपन में क्रिकेट खेलते थे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर का बचपन मुंबई में बीता। करीब 13 साल की उम्र में वह शिवाजी पार्क में क्रिकेट खेलने और प्रैक्टिस करने जाया करते थे, वो ऑफ-स्पिन गेंदबाजी किया करते थे। उस दौर में शिवाजी पार्क मुंबई के युवा क्रिकेटरों के लिए एक बड़ा केंद्र माना जाता था। इस मैदान ने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट को कई बड़े खिलाड़ी दिए, जिनमें सुनील गावस्कर और संदीप पाटिल जैसे नाम शामिल हैं।
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नाना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह खुद अच्छे क्रिकेटर थे और ऑफ-स्पिन गेंदबाजी करते थे। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से उनके पास क्रिकेट की महंगी ट्रेनिंग लेने के पैसे नहीं थे। इसलिए वह शिवाजी पार्क चले जाते थे और वहां नेट प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ियों को गेंदबाजी किया करते थे। नाना का क्रिकेट से लगाव सिर्फ बचपन तक सीमित नहीं रहा। उम्र बढ़ने के बाद भी वह इस खेल को बेहद पसंद करते रहे। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर उन्हें 10 दिन प्रैक्टिस करने का मौका मिले, तो वह फिर से अच्छी गेंदबाजी कर सकते हैं। उनके कहा था कि उनके अंदर आज भी एक क्रिकेटर मौजूद है।
क्रिकेट से दूर हुए तो अभिनय की दुनिया में छा गए
परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक परेशानियों के बीच क्रिकेट छोड़ उन्हें अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए दूसरे रास्ते तलाशने पड़े। धीरे-धीरे उनका रुझान थिएटर और अभिनय की ओर बढ़ा और यहीं से उनकी जिंदगी ने एक नई दिशा पकड़ ली। क्रिकेट में करियर बनाने का सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन नाना पाटेकर ने अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने थिएटर से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और बाद में फिल्मों का रुख किया। 1978 में फिल्म 'गमन' से उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्निसाक्षी', 'प्रहार', 'अब तक छप्पन', 'वेलकम' और मराठी फिल्म 'नटसम्राट' जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाईं। नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खासियत उनकी दमदार एक्टिंग और डायलॉग बोलने का अलग अंदाज था। वह विलेन से लेकर गंभीर, भावुक और कॉमेडी किरदारों तक को इतनी सहजता से निभाते थे कि हर भूमिका दर्शकों के दिल में उतर जाती थी।
