लगातार दूसरे साल IPL चैंपियन बनने में Royal Challengers Bengaluru का सबसे बड़ा जीत का फॉर्मूला क्या रहा? क्या Rajat Patidar की कप्तानी ने RCB को एक नई चैंपियन टीम में बदल दिया है? आखिर क्यों इस बार सिर्फ Virat Kohli नहीं, बल्कि पूरी टीम RCB की ताकत बनकर उभरी?

नई दिल्ली। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने लगातार दूसरे साल IPL का खिताब जीतकर अपने करोड़ों फैंस को जश्न मनाने का मौका दिया है। पिछले साल जब RCB ने ट्रॉफी जीती थी, तो उसे एक इमोशनल जीत के तौर पर देखा गया था। लेकिन इस बार की जीत बताती है कि यह टीम अब एक चैंपियन की तरह सोचना और खेलना सीख गई है। चलिए RCB की इस जीत के फॉर्मूले को करीब से समझते हैं और जानते हैं कि वो कौन सी बातें थीं, जिन्होंने टीम को फिर से चैंपियन बनाया।

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1- टीम का परफेक्ट बैलेंस

RCB की जीत का सबसे बड़ा कारण टीम का संतुलन था। टीम हर मैच में 8 बल्लेबाजों और 6 गेंदबाजों के ऑप्शन के साथ उतरती थी। खास बात यह थी कि उनके गेंदबाज भी अच्छी बल्लेबाजी कर सकते थे। इसका सबसे बड़ा सबूत रायपुर में मुंबई इंडियंस के खिलाफ वो मैच है, जिसे भुवनेश्वर कुमार और रसिक सलाम ने अपने दम पर जिताया था।

2- अटैकिंग खेल, नो डिफेंस

RCB ने पूरे टूर्नामेंट में डिफेंसिव होने के बजाय अटैकिंग क्रिकेट खेला। कई मैचों में टीम दबाव में भी आई, लेकिन उसने अपना आक्रामक अंदाज नहीं छोड़ा। मुंबई और लखनऊ के खिलाफ मुश्किल मैचों में टीम ने जिस तरह का जुझारूपन दिखाया, वो उनकी इसी सोच का नतीजा था।

3- पावर-प्ले का किंग

RCB का जीत का फॉर्मूला बहुत सीधा था - पावर-प्ले में ही मैच अपनी तरफ खींच लो। बल्लेबाजी में टीम ने पहले 6 ओवरों में 10 से ज्यादा के औसत से 900 से ज्यादा रन बनाए। वहीं गेंदबाजी में, पावर-प्ले के अंदर 33 से ज्यादा विकेट चटकाए। यही टीम की सफलता का एक और बड़ा कारण बना। ज्यादातर टीमें 7 से 15वें ओवर के बीच रन गति धीमी होने से मैच हारती हैं, लेकिन RCB ने इस फेज में भी अच्छा खेल दिखाया और डेथ ओवर्स में विरोधी टीमों पर हावी रही।

4- रजत की स्मार्ट कप्तानी

पिछले साल जब रजत पाटीदार ने पहली बार कप्तानी संभाली थी, तो उन्हें मैदान पर विराट कोहली से सलाह लेते देखा गया था। लेकिन इस साल रजत एक मंझे हुए कप्तान की तरह दिखे। गेंदबाजों का इस्तेमाल हो, फील्ड प्लेसमेंट हो या बल्लेबाजों का सही समय पर उपयोग, रजत को पूरे नंबर मिलने चाहिए।

RCB कोचिंग स्टाफ के मुताबिक, रजत मैच से पहले ज्यादा बात नहीं करते और न ही बहुत ज्यादा सोचते हैं। वो कोच और एनालिस्ट के साथ जरूरत से ज्यादा प्लानिंग भी नहीं करते। लेकिन मैच शुरू होने के बाद, वो हालात के हिसाब से अपने प्लान बदलते हैं और अपने फैसलों पर डटे रहते हैं। यही उनकी सफल कप्तानी का राज है।

5- टीम में कोई एक नहीं, हर कोई स्टार

RCB ने 2-3 सुपरस्टारों पर निर्भर रहने की आदत छोड़ी और मैच-विनर्स की एक पूरी फौज तैयार की। टीम का हर खिलाड़ी अकेले दम पर मैच जिताने की काबिलियत रखता था। इसका सबूत यह है कि फाइनल से पहले RCB ने जो 10 मैच जीते, उनमें 8 अलग-अलग खिलाड़ियों को 'प्लेयर ऑफ द मैच' का अवॉर्ड मिला।

6- टॉस जीतो या हारो, फर्क नहीं पड़ता

RCB ने इस धारणा को ही खत्म कर दिया कि टॉस जीतना बहुत जरूरी होता है। टीम ने टॉस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अपनी काबिलियत पर भरोसा रखकर कामयाबी हासिल की।

7- खिलाड़ियों पर दिखाया पूरा भरोसा

एक कामयाब टीम बनने के लिए मैनेजमेंट का अपने खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाना बहुत जरूरी है। इस सीजन में जितेश शर्मा, रोमारियो शेफर्ड और जैकब बेथेल उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए, लेकिन टीम ने लगातार उनका साथ दिया। युवा तेज गेंदबाज रसिक सलाम को बड़ी जिम्मेदारी देना भी यह दिखाता है कि टीम मैनेजमेंट अपने खिलाड़ियों पर कितना भरोसा करता है।

8- मजबूत बेंच स्ट्रेंथ

यह कहना गलत नहीं होगा कि RCB ने आधी चैंपियनशिप तो ऑक्शन टेबल पर ही जीत ली थी। टीम की बेंच स्ट्रेंथ कमाल की थी। हर बड़े खिलाड़ी के लिए एक शानदार बैकअप मौजूद था। जैसे - हेजलवुड के विकल्प के तौर पर जैकब डफी, देवदत्त पडिक्कल की फॉर्म खराब होने पर वेंकटेश अय्यर, फिल साल्ट के फेल होने या चोटिल होने पर जैकब बेथेल, और अगर वो भी फेल होते तो जॉर्डन कॉक्स। इसी तरह, जब अभिनंदन सिंह उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे तो उनकी जगह रसिक सलाम को लाया गया। एक लेफ्ट-आर्म पेसर की जरूरत के लिए मंगेश यादव को तैयार रखा गया। यही RCB का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट साबित हुआ।