वर्ल्ड कप फाइनल में संजू सैमसन का मुकाबला न्यूजीलैंड के गेंदबाज हेनरी, सैंटनर और फर्ग्यूसन से है। पहले वे उन पर भारी पड़े थे, पर अब संजू का आत्मविश्वास बढ़ा है। यह जंग ही मैच का नतीजा तय कर सकती है।

टी20 वर्ल्ड कप फाइनल स्पेशलः क्या वो अकेले दम पर इस ड्रीम टीम को संभाल पाएगा? जवाब के लिए आप ईडन गार्डन्स की तरफ देख सकते हैं। क्या वो दबाव और मजबूत टीम के सामने बिखर जाएगा? इसका जवाब वानखेड़े के दर्शक दे देंगे। लेकिन अभी कुछ खत्म नहीं हुआ है। एक हिसाब अभी बाकी है। न्यूजीलैंड, मैट हेनरी, मिचेल सैंटनर। तारीख 31 जनवरी 2026। तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड स्टेडियम में लॉकी फर्ग्यूसन की एक तेज रफ्तार गेंद ने पूरे स्टेडियम में सन्नाटा फैला दिया था। सबकुछ वापस पाने का आखिरी मौका भी हाथ से निकल गया। संजू सैमसन अपनी सारी जिम्मेदारी ईशान किशन को सौंपकर मैदान के किनारे लौट रहे थे। कीवी टीम ने उस सीरीज को जीतकर संजू के वर्ल्ड कप सपनों को तोड़ दिया था।

उस सीरीज में संजू के स्कोर थे- 10, 6, 0, 24, और 6। वो सिर्फ मैट हेनरी के सामने ही दो बार आउट हुए। सैंटनर की गेंद पर बोल्ड हुए। काइल जैमीसन और फर्ग्यूसन ने भी उन्हें एक-एक बार पवेलियन भेजा। पांच मैचों में सिर्फ 46 रन बनाकर संजू की वर्ल्ड कप की तैयारी खत्म हो गई और वो डगआउट में बैठने को मजबूर हो गए।

लेकिन, अहमदाबाद के फाइनल में जो संजू पैड पहनकर उतरेंगे, वो वो नहीं हैं जिन्हें न्यूजीलैंड ने आसानी से ढेर कर दिया था। उनके साथ दो बार की चैंपियन वेस्टइंडीज और इंग्लैंड को अकेले दम पर हराने का आत्मविश्वास है। अहमदाबाद में उनके हाव-भाव में दबाव की एक झलक भी नहीं दिखेगी, क्योंकि वो अपने करियर की सबसे बड़ी नाकामी से उबरकर वापस आए हैं।

इसलिए, अगर न्यूजीलैंड को खिताब की उम्मीदें जिंदा रखनी हैं, तो उन्हें सबसे पहले अभिषेक, ईशान या सूर्या को नहीं, बल्कि संजू को ही आउट करना होगा। सैंटनर को यह बात अच्छी तरह पता होगी। कीवी टीम इसकी संभावनाएं भी तलाश रही होगी। इसमें सबसे पहली जंग है हेनरी बनाम संजू।

अपने करियर में संजू ने हेनरी की सिर्फ 10 गेंदें खेली हैं और 15 रन बनाए हैं। लेकिन वो दो बार आउट भी हुए हैं। दोनों बार जब मैट हेनरी ने विकेट लिया, तब संजू भारत के लिए ओपनिंग कर रहे थे। इस कीवी पेसर ने संजू को पहला ओवर भी पूरा नहीं खेलने दिया। रायपुर में पांचवीं गेंद पर और गुवाहाटी में पहली ही गेंद पर मैट हेनरी ने बाजी मार ली। लेकिन हेनरी के खिलाफ भी संजू ने अपना अटैकिंग अंदाज नहीं बदला। बनाए गए 15 में से 14 रन बाउंड्री से आए, जिसमें एक छक्का और दो चौके शामिल थे।

हेनरी के बाद न्यूजीलैंड टीम में संजू के खिलाफ सबसे अच्छा रिकॉर्ड कप्तान सैंटनर का है। इंटरनेशनल T20 में संजू सैंटनर की सिर्फ तीन गेंदें ही खेल पाए हैं, जिसमें वो क्लीन बोल्ड हुए और सिर्फ एक रन बना सके। IPL में सैंटनर के खिलाफ संजू का स्ट्राइक रेट सिर्फ 14।3 का है। वहां भी सैंटनर ने उन्हें 7 गेंदों में दो बार आउट किया है। इसलिए सैंटनर, संजू के सामने पहला ओवर डालने से नहीं हिचकिचाएंगे।

कुछ ऐसी ही कहानी लॉकी फर्ग्यूसन के खिलाफ भी है। इंटरनेशनल T20 में फर्ग्यूसन और संजू का आमना-सामना सिर्फ एक बार हुआ है, तिरुवनंतपुरम में। उस दिन क्या हुआ था, ये पूरी क्रिकेट दुनिया ने देखा। क्रिकेट एक्सपर्ट्स अक्सर कहते हैं कि संजू को बहुत तेज गति की गेंदों को खेलने में थोड़ी मुश्किल होती है, और फर्ग्यूसन इसका एक उदाहरण हैं।

IPL में फर्ग्यूसन की 18 गेंदों पर संजू सिर्फ 17 रन ही बना पाए हैं। इसमें दो चौके शामिल हैं और वो एक बार आउट भी हुए हैं। इसलिए हेनरी-सैंटनर-फर्ग्यूसन बनाम संजू, यह मैच की सबसे अहम जंग में से एक होगी। लेकिन इस बार इस तिकड़ी के लिए संजू को काबू करना आसान नहीं होगा। अगर यकीन न हो तो जोफ्रा आर्चर से पूछ लीजिए।

इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले आर्चर का संजू पर दबदबा था। आर्चर ने 23 गेंदों में सिर्फ 25 रन देकर संजू को तीन बार आउट किया था, वो भी एक ही सीरीज में। लेकिन वानखेड़े में संजू के बल्ले से निकली गेंदें लगातार बाउंड्री के पार जा रही थीं। भारतीय पारी खत्म होने तक संजू ने आर्चर के खिलाफ सिर्फ 14 गेंदों पर 38 रन ठोक दिए थे, जिसमें चार छक्के और तीन चौके शामिल थे। इस वर्ल्ड कप में संजू सारे पुराने आंकड़ों को धता बताते हुए आगे बढ़ रहे हैं। अगर उन्होंने इसे फाइनल में भी दोहराया, तो कई इतिहास फिर से लिखे जाएंगे।