विराट कोहली और अनुष्का शर्मा वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे। दोनों ने प्रवचन सुना और आशीर्वाद लिया। कपल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पिछले 5 महीनों में यह उनकी तीसरी यात्रा है।

Virat-Anushka Meet Premanand Maharaj: IPL 2026 के बिजी शेड्यूल के बीच विराट कोहली पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ एक बार फिर वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज जी के आश्रम पहुंचे। 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के मौके पर कपल ने महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। बताया जा रहा है कि पिछले 5 महीनों में यह तीसरी बार है, जब विराट और अनुष्का प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे हैं। कोहली-अनुष्का का आध्यात्म की ओर झुकाव किसी से छिपा नहीं है। यह कपल अक्सर मंदिरों और संतों के सत्संग में नजर आता है।

आश्रम में भक्ति भाव से बैठे नजर आए विराट-अनुष्का

वायरल हो रहे वीडियो में विराट-अनुष्का प्रेमानंद महाराज के आश्रम में अन्य लोगों के साथ बैठकर उनका प्रवचन सुनते दिखे। यह वीडियो श्री हित राधा केली कुंज से सामने आया है, जिसमें दोनों पूरे भक्ति भाव के साथ आध्यात्मिक चर्चा में शामिल होकर आशीर्वाद लेते नजर आए। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस इस कपल के इस सादगी भरे अंदाज और आध्यात्मिक जुड़ाव की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

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प्रेमानंद महाराज कौन हैं?

प्रेमानंद महाराज, जिनका असली नाम प्रेमानंद गोविंद शरण है, आज एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाने जाते हैं। वे खासतौर पर भक्ति, सादगी और आत्म-अनुशासन पर आधारित अपने उपदेशों के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रेमानंद महाराज राधा वल्लभ संप्रदाय के अनुयायी हैं। उनकी शिक्षाएं भक्ति (श्रद्धा), संतुलित जीवन और आंतरिक शांति पर केंद्रित होती हैं, जिससे कई लोग प्रभावित होते हैं।

शुरुआती जीवन और संन्यास

प्रेमानंद महाराज का जन्म 30 मार्च 1971 को उत्तर प्रदेश में अनिरुद्ध कुमार पांडे के रूप में हुआ था। कम उम्र से ही उनका झुकाव आध्यात्म की ओर था। सिर्फ 13 साल की उम्र में उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर संन्यास ले लिया और आध्यात्मिक साधना शुरू की। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा वाराणसी में गंगा नदी के किनारे बिताया। यहां उन्होंने ध्यान, साधना और गुरुजनों के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक ज्ञान हासिल किया, जिससे उनकी सोच और भी गहरी होती गई।

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दीक्षा और आध्यात्मिक नाम

राधा वल्लभ संप्रदाय में दीक्षा लेने के बाद उन्हें ‘आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी’ नाम मिला। बाद में उनकी पहचान ‘स्वामी अखंडानंद आश्रम’ और फिर ‘प्रेमानंद गोविंद शरण’ के रूप में बनी। उनके गुरु गौरंगी शरण ने उनके आध्यात्मिक जीवन को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।