ADR रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के नए 243 विधायकों में से 90% करोड़पति हैं। सबसे गरीब विधायक की संपत्ति ₹6.53 लाख है। यह विश्लेषण चुनावी राजनीति में धन के बढ़ते प्रभाव और आर्थिक असमानता को दर्शाता है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के निर्णायक नतीजों के बाद राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सत्ता वापसी का मार्ग स्पष्ट हो चुका है। इस राजनीतिक बदलाव के बीच, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच द्वारा जारी एक विस्तृत विश्लेषण ने सदन में पहुंचने वाले 243 नवनिर्वाचित विधायकों की आर्थिक तस्वीर को उजागर किया है। इस विश्लेषण का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि बिहार की नई विधानसभा में लगभग 90% विधायक करोड़पति हैं।

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करोड़पतियों के सैलाब में सबसे गरीब चेहरे

नवनिर्वाचित विधायकों के इस आर्थिक सैलाब के बीच, कुछ चेहरे अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से भी सदन तक पहुंचने में सफल रहे हैं। पीरपैंती सीट से भाजपा प्रत्याशी मुरारी पासवान सदन के सबसे गरीब सदस्य बने हैं, जिनकी कुल संपत्ति महज़ ₹6.53 लाख रुपये दर्ज की गई है। इनमें उनकी चल संपत्ति ₹1.53 लाख और अचल संपत्ति ₹5 लाख है।

दूसरे सबसे कम संपत्ति वाले विधायक भोजपुर के अगिआंव से भाजपा के महेश पासवान हैं, जिनकी कुल संपत्ति ₹8.55 लाख है, जबकि तीसरे स्थान पर राजनगाँव से भाजपा के सुजीत कुमार हैं, जिनकी संपत्ति लगभग ₹11 लाख दर्ज की गई है। ये आंकड़े करोड़पतियों के वर्चस्व के बीच आम आर्थिक पृष्ठभूमि वाले कुछ प्रतिनिधियों की उपस्थिति को रेखांकित करते हैं।

संपत्ति में भारी उछाल और हार

आर्थिक आंकड़ों से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य आरजेडी के पूर्व विधायक रामवृक्ष कदम से संबंधित है। 2020 के चुनाव में वह सबसे गरीब विधायक थे, जब उनकी कुल संपत्ति केवल ₹70,000 थी। हालांकि, 2025 तक उनकी संपत्ति में भारी उछाल आया और यह ₹85 लाख के पार पहुँच गई। संपत्ति में इतनी तेज़ी से हुई वृद्धि के बावजूद, वह इस बार अपनी अलौली की सीट बचाने में सफल नहीं हो सके।

भारी देनदारी और बाहुबलियों का कर्ज

विश्लेषण में यह तथ्य भी सामने आया है कि कुछ विधायक ऐसे भी सदन में पहुँचे हैं, जिनकी संपत्ति तो करोड़ों में है, लेकिन उन पर देनदारी (कर्ज़) उससे भी कई गुना अधिक है। इस सूची में सबसे ऊपर आरजेडी के शंभु नाथ यादव का नाम है, जिनकी कुल संपत्ति ₹12 करोड़ रुपये है, लेकिन उन पर देनदारी ₹66 करोड़ रुपये से भी ज्यादा दर्ज है। इसके अलावा, मोकामा से बाहुबली छवि वाले अनंत सिंह की कुल संपत्ति ₹100 करोड़ है, जिसमें उनकी पत्नी नीलम देवी की संपत्ति शामिल है, जबकि उन पर ₹25 करोड़ रुपये की देनदारी है।

लोकतंत्र पर उठते गंभीर सवाल

बिहार की नई विधानसभा के ये आंकड़े एक बार फिर यह सवाल खड़ा करते हैं कि जनता के नाम पर राजनीति करने वाले प्रतिनिधियों की यह आर्थिक सच्चाई किस ओर इशारा करती है। जब 90% प्रतिनिधि करोड़पति होते हैं, तो यह प्रश्न अनिवार्य हो जाता है: क्या लोकतंत्र वास्तव में आम आदमी की आवाज़ है, या फर्श से अर्श तक की दौड़ में अब सिर्फ पूँजी की ही चलती है? बिहार की नई विधानसभा स्पष्ट रूप से यह संकेत दे रही है कि चुनावी सफलता के लिए वित्तीय क्षमता एक महत्वपूर्ण कारक बन गई है, जिसने आम मतदाताओं और उनके प्रतिनिधियों के बीच की आर्थिक खाई को व्यापक कर दिया है।