Bihar Election 2025: 

Darbhanga Voter List Controversy: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने दरभंगा में एक भाजपा महिला नेता पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने वीडियो में लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया है।

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तेजस्वी यादव ने लगाए गंभीर आरोप

तेजस्वी यादव ने हाल ही में एक वीडियो शेयर कर आरोप लगाया था कि भाजपा की महिला जिला अध्यक्ष कविता कुमारी उर्फ सपना भारती दरभंगा के एक मतदान केंद्र पर एसआईआर प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि बीएलओ मतदाताओं के घर नहीं जा रहे हैं, बल्कि लोगों को निर्धारित केंद्रों पर बुलाया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

वीडियो में, एक स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता जमाल हसन यह कहते हुए सुने गए कि भाजपा नेता कविता कुमारी मतदाता सूची में हेराफेरी कर रही हैं और आम मतदाताओं को परेशान कर रही हैं। उन्होंने आयोग की भूमिका को संदिग्ध बताया और जांच की मांग की।

जांच के बाद आयोग ने किया खंडन

इस वीडियो और आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि यह वीडियो "सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करने" का एक प्रयास है। बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा की गई जाँच में यह बात सामने आई कि भाजपा नेता कविता कुमारी उस केंद्र पर केवल अपने और अपने परिवार के दस्तावेज़ जमा करने गई थीं। उन्होंने नियमानुसार फॉर्म-6 भरा था, जो एक वैध प्रक्रिया है।

चुनाव आयोग ने कहा कि कविता कुमारी के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनियमितता या हस्तक्षेप का कोई सबूत नहीं मिला है। साथ ही, बीएलओ पर लगे लापरवाही के आरोप भी झूठे पाए गए। आयोग के अनुसार, बीएलओ द्वारा मतदाताओं से संपर्क करने की प्रक्रिया ठीक से चल रही है।

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राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की संभावना

जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वीडियो बनाने वाले जमाल हसन और कविता कुमारी के बीच पहले से ही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। आयोग का मानना है कि इसी वजह से यह वीडियो बनाया गया और सोशल मीडिया पर वायरल किया गया ताकि माहौल को भ्रामक बनाया जा सके।

आयोग की अपील- अफवाहें न फैलाएं

आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे तथ्यों की पुष्टि किए बिना ऐसे भ्रामक वीडियो न फैलाएँ। इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया में अविश्वास फैलता है, बल्कि मतदाताओं में भ्रम भी पैदा होता है।

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