बिहार के चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रा सोनम कुमारी ने रहस्यमय परिस्थितियों में आत्महत्या की। क्या प्रिंसिपल के कथित उत्पीड़न और धमकियों ने इसे जन्म दिया? जांच अभी जारी है, सच सामने आने का इंतजार।

पटना: बिहार के चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज से एक दुखद और रहस्यमय घटना सामने आई है। कॉलेज की सिविल इंजीनियरिंग की द्वितीय वर्ष की छात्रा सोनम कुमारी ने बुधवार रात अपने छात्रावास की तीसरी मंजिल से छलांग लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली। छात्रा मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड की रहने वाली थी और मात्र 20 वर्ष की थी। सोनम की मौत के कारणों की अभी पुलिस जांच जारी है, लेकिन उसके सहपाठियों ने कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गोपाल नंदन पर कथित उत्पीड़न और धमकियों का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि प्रिंसिपल शिकायतों का समाधान करने के बजाय छात्रों को दबाव में रखते थे और उन्हें चुप रहने का आदेश देते थे।

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क्या कॉलेज प्रशासन ने बचाव में समय पर मदद नहीं की?

छात्रों का आरोप है कि जब सोनम घायल अवस्था में लगभग 30 मिनट तक पड़ी रही, तब प्रिंसिपल ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए कॉलेज वाहन उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। अंततः उसे स्थानीय रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद कॉलेज परिसर में बड़ी संख्या में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। गुस्साए छात्रों ने एक डीएसपी के सरकारी वाहन को क्षतिग्रस्त किया और स्कूटर में आग लगा दी। छात्रों ने प्राचार्य को मौके पर बुलाने की भी मांग की।

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पुलिस और प्रशासन ने लिया नियंत्रण

जैसे-जैसे तनाव बढ़ा, पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए एएसपी मोहम्मद नूरुल हक, तीन डीएसपी और 20 थानों के पुलिस बल तैनात किए। नालंदा के पुलिस अधीक्षक भरत सोनी ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। चंडी थाना प्रभारी सुमन कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और छात्रों व अभिभावकों के बयान के आधार पर मौत के सही कारणों का पता लगाया जाएगा।

क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत कारण थी या उत्पीड़न का मामला?

मृतक की करीबी दोस्त शिखा कुमारी, जिसने घटना देखी थी, मानसिक रूप से अत्यधिक क्षतिग्रस्त हो गई और उसे पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि यदि उत्पीड़न या लापरवाही के आरोप सही पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

क्या यह सिर्फ एक isolated घटना है? 

छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि उत्पीड़न और दबाव जैसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इस केस से शिक्षा संस्थानों में निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग तेज हो गई है।