बिहार चुनाव 2025 में चिराग पासवान की लोजपा (रा) ने शानदार प्रदर्शन किया। पार्टी ने 19 सीटें जीतकर NDA में 'किंगमेकर' की भूमिका हासिल की। उन्होंने कई मुश्किल सीटों पर भी जीत दर्ज कर गठबंधन को बड़ी बढ़त दिलाई।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में एक चेहरा सबसे ज्यादा चमका है, चिराग पासवान। NDA की 200+ सीटों वाली सुनामी में जहां BJP और JDU ने अपना पारंपरिक असर दिखाया, वहीं लोजपा (रामविलास) ने वह धमाका कर दिया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। चिराग पासवान की पार्टी न सिर्फ गठबंधन की 'किंगमेकर' बनी, बल्कि कई ऐसी सीटों पर जीत दर्ज की जिनपर NDA का इतिहास बेहद कमजोर रहा था।

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पिछली बार महज 1 सीट तक सिमट चुकी लोजपा (रा) इस बार करीब 19 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है। यानी प्रदर्शन में रिकॉर्ड उछाल। यह उछाल सिर्फ नंबरों का नहीं, रणनीति, जमीनी असर और चिराग के ‘यंग लीडर’ इमेज की जीत है।

मुश्किल सीटें भी आसानी से जीत लीं

लोजपा (रा) को NDA ने इस चुनाव में ऐसी कई सीटें दी थीं जिन्हें “कठिन” माना जाता था। जहां या तो NDA वर्षों से नहीं जीता था या पिछली बार 3rd या 4th नंबर पर रहा था। इसके बावजूद चिराग की टीम वहां जीत निकालकर सभी को चौंका दिया। लोजपा (रा) अब तक जिन सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, उनमें कई सीटें अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती थीं।

बिहार चुनाव 2025 में किन सीटों पर चिराग पासवान ने दर्ज की जीत

  • बख्तियारपुर
  • गोविंदगंज
  • बेलसंड
  • सुगौली
  • बखरी
  • महुआ
  • ब्रह्मपुर
  • देहरी
  • नाथनगर
  • परबत्ता
  • बलरामपुर
  • कस्बा
  • सिमरी बख्तियारपुर
  • बोचाहा
  • शेरघाटी
  • गोविंदपुर
  • ओबरा
  • दरौली

इनमें से कई सीटों पर 2005 के बाद NDA कभी नहीं जीत पाया था। कुछ जगहों पर लोजपा पिछली बार तीसरे या चौथे पायदान पर थी। लेकिन इस बार चिराग की एंट्री ने पूरा समीकरण उलट दिया। चिराग पासवान की छवि ‘मोदी के हनुमान’ और ‘यंग बिहारी लीडर’ के रूप में फलीभूत हुई। उनका ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ नैरेटिव इस चुनाव में पूरी तरह क्लिक कर गया।

रुझानों और नतीजों का विश्लेषण बताता है कि लोजपा (रा) को OBC समुदाय में भारी समर्थन मिला। युवाओं में चिराग की लोकप्रियता पहले से ज्यादा बढ़ी। गठबंधन की अंदरूनी खींचतान के बावजूद चिराग ने अपना वोटबैंक बरकरार ही नहीं रखा, बल्कि बढ़ाया भी।

BJP–JDU–LJPR: NDA में ‘तीन स्तंभ’ मजबूत हुए

जहां BJP सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, वहीं JDU ने 80+ सीटें जीतकर अपनी पकड़ दिखाई। लेकिन तस्वीर में सबसे बड़ा आश्चर्य चिराग बने, जिनकी पार्टी इस बार गठबंधन में तीसरे स्तंभ की तरह खड़ी हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग ने ‘कठिन सीटों’ पर NDA की नाव पार लगाई, युवाओं और महिलाओं के वोट लाने में उन्होंने BJP-जेडीयू की मदद की और चुनाव प्रचार में उनकी आक्रामक, साफ-सुथरी और सकारात्मक कैंपेनिंग काम आई। 28 उम्मीदवार मैदान में उतारे गए थे, जिनमें से 19 की जीत तय दिख रही है। अगर यही आंकड़ा अंतिम नतीजों में कायम रहा, तो लोजपा (रा) का स्ट्राइक रेट लगभग 73% रहेगा, जो एक असाधारण प्रदर्शन है।