1993 में AK-47 से हुए हमले के बीच मोकामा के पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की जान एक गाय ने बचा ली थी। अपराध से राजनीति तक का उनका सफर और परिवार की राजनीतिक पकड़ आज भी बिहार की सियासत में चर्चा का विषय है।

पटनाः बिहार की राजनीति में कई ऐसे बाहुबलियों की कहानियाँ सुनाई जाती हैं, जो गहरे संघर्ष और जान जोखिम में डालकर आगे बढ़ने की मिसाल हैं। ऐसी ही एक कहानी है मोकामा के पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की, जिनकी जान 1993 में एके-47 की गोलियों के बीच एक अनोखी घटना ने बचा ली थी। उस वक़्त एक गाय बीच में आकर सूरजभान सिंह की जान की ढाल बन गई थी। यह कहानी सिर्फ़ एक इंसान के ज़िंदा रहने की कहानी नहीं है, बल्कि उस बिहार की तस्वीर भी है जहाँ ज़िंदगी और मौत की जंग रोज़मर्रा की बात थी।

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ताबड़तोड़ बरस रही थी गोलियां

1993 में मोकामा में सूरजभान सिंह और बेगूसराय के कुख्यात बाहुबली अशोक सम्राट के बीच सियासी और क्षेत्रीय सत्ता संघर्ष चरम पर था। उस दिन सुबह-सुबह अशोक सम्राट ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाकर AK-47 से सूरजभान सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। उस हमले में सूरजभान सिंह के पैर में गंभीर चोट आई और उनके साथ खड़े दो करीबी मारे गए।

लेकिन ज़िंदगी की इस घातक लड़ाई के बीच एक अप्रत्याशित नायक सामने आया, एक गाय जिसने खुद को सूरजभान सिंह और मौत के बीच खड़ा कर दिया। उस गाय की वजह से गोलियां सीधे सूरजभान तक नहीं पहुंच सकीं और वे बच गए। हालांकि, उनकी जान तो गई नहीं लेकिन पैर में लगी गोली का दर्द और जख्म आज भी उन्हें याद दिलाता रहता है। डॉक्टरों ने कई बार पैर काटने की सलाह दी, मगर सूरजभान सिंह ने कभी इस सलाह को मानने से इनकार किया।

अपराध से सियासत तक का सफर

सूरजभान सिंह की शुरुआत छोटे मोटे अपराधों से हुई। 1980 के दशक में रंगदारी, अपहरण और हत्या के मामलों में उनका नाम उभरा। उनके दौर की कुख्यात घटनाओं में राबड़ी देवी के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या, मधुरापुर कांड और यूपी के बाहुबली श्रीप्रकाश शुक्ला को AK-47 थमाना शामिल हैं। फिर 2000 में उन्होंने राजनीतिक पटल पर बड़ा कदम उठाया, जब मोकामा से निर्दलीय विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने नीतीश कुमार का समर्थन कर बिहार में नई राजनीतिक स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाई। लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान भी उनके नजदीक आए और 2004 में बलिया से सांसद बनाकर उन्हें LJP का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया।

परिवार की राजनीति और आज भी जारी सत्ता संग्राम

सूरजभान सिंह खुद चुनाव लड़ने में असमर्थ हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक दौलत उनकी पत्नी वीणा देवी, भाई चंदन सिंह और अन्य परिवार के सदस्य संभाल रहे हैं। उनमें से हर एक चुनाव के मैदान में सक्रिय है। 2025 के बिहार चुनाव में उनकी राजनीति में अनंत सिंह पर हमला करते हुए ‘इतिहास, भूगोल और गणित बदलने’ की चुनौती सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी। वहीं, आरजेडी ने शहाबुद्दीन के परिवार को अपनाया है और एनडीए के भीतर भी बाहुबली परिवार की सियासी टक्कर छिड़ी हुई है।