हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसने कठिन परिस्थतियों के सामने हिम्मत नहीं हारी बल्कि डटकर मुकाबला किया। बेकार समझे जाने वाले प्लास्टिक कचरे से सजावटी और उपयोगी सामान बनाने का हुनर सीखा और उन्हीं सामानों की बिक्री से कमाई करने लगी।

मुजफ्फरपुर। हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसने कठिन परिस्थतियों के सामने हिम्मत नहीं हारी बल्कि डटकर मुकाबला किया। बेकार समझे जाने वाले प्लास्टिक कचरे से सजावटी और उपयोगी सामान बनाने का हुनर सीखा और उन्हीं सामानों की बिक्री से कमाई करने लगी। मुजफ्फरपुर के सीहोर गांव की रहने वाली बबीता के अबला से आत्मनिर्भर बनने की यह कहानी पूरे दश में गूंज रही है। उन्होंने दर्जनों म​हिलाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखाई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें 4 मार्च को देश की राजधानी दिल्ली में स्वच्छ सुजल शक्ति सम्‍मान 2023 से सम्मानित करेंगी।

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पति की दिव्यांगता के बाद जीविका की सदस्य बनीं

बबीता का परिवार पहले काफी खुशहाल था। पति की दिव्यांगता के बाद परिवार पर संकट के बादल मंडराने लगे तो बबीता ने स्वयं सहायता समूह (जीविका) की सदस्यता ली। समूह के माध्यम से ही उन्होंने प्लास्टिक कचरे से सजावटी सामग्री बनाने का हुनर सीखा। उन सामानों की बिक्री से उनकी कमाई होती है।

24 से अधिक महिलाएं बन चुकी हैं आत्मनिर्भर

स्वावलंबी बनने के बाद उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। उनकी इस पहल का ही नतीजा है कि अब तक 24 से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। बबीता अपने स्वयं सहायता समूह के उत्पादों को पटना में आयोजित की गई विश्व शौचालय दिवस की प्रदर्शनी, राजगीर महोत्सव और समाधान यात्रा में भी प्रदर्शित कर चुकी हैं।

प्लास्टिक कचरे बनाती हैं ये सामान

बबीता प्लास्टिक बोतलों से कृत्रिम फूल के बुके बनाती हैं। प्लास्टिक कचरों व रंगों के जरिए सूती व ऊनी धागे भी बनाए जाते हैं। एक्स-रे फिल्म की कतरनों से बैग, पर्स, रंग बिरंगे गुलदस्ते, लटकनी पाउच आदि बनाई जाती है। इन उत्पादों को लोग पसंद करते हैं और उसे अच्छी कीमतों में खरीदते हैं।

कचरे को जीविकोपार्जन का जरिया बनाने वाले होंगे उत्साहित

जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी-सह-लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, राहुल कुमार का कहना है कि बबीता को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने से कचरे को 'संसाधन' में बदलने और इसे जीविकोपार्जन का जरिया बनाने वाले उत्साहित होंगे।