Bihar Election News: असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग पर बिहार में NRC लागू करने का आरोप लगाया है। नए नियमों के तहत, मतदाता सूची में नाम के लिए जन्म प्रमाण पत्र समेत कई दस्तावेज़ ज़रूरी होंगे, जिससे लाखों गरीबों का वोटिंग अधिकार छिन सकता है।

Asaduddin Owaisi Big Claim: हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग पर बिहार में गुप्त रूप से नागरिकता सत्यापन (एनआरसी) लागू करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अब मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए नागरिकों को अपने और अपने माता-पिता के जन्म स्थान और जन्म तिथि के दस्तावेज जमा कराने होंगे। ओवैसी ने चेतावनी दी कि इससे बिहार के लाखों गरीब लोग, खासकर बाढ़ प्रभावित सीमांचल के निवासी, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं, मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएंगे। ओवैसी ने जोर देकर कहा, 'सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल 75% लोग ही जन्म से पंजीकृत होते हैं। ऐसे में गरीबों से उनके माता-पिता के दस्तावेज मांगना क्रूर मजाक है।'' 1995 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले (लाल बाबू हुसैन केस) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बिना सबूत के किसी को भी वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता।

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सोसल मीडिया पर किया पोस्ट

सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट में AIMIM प्रमुख ने लिखा कि अब हर नागरिक को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाने के लिए दस्तावेजों के जरिए यह साबित करना होगा कि वह कब और कहां पैदा हुआ और साथ ही यह भी बताना होगा कि उसके माता-पिता कब और कहां पैदा हुए। ओवैसी ने लिखा कि ‘अनुमान के मुताबिक, केवल तीन-चौथाई जन्म ही पंजीकृत होते हैं, ज़्यादातर सरकारी कागज़ात में भारी ग़लतियाँ हैं। बाढ़ प्रभावित सीमांचल क्षेत्र के लोग सबसे ग़रीब हैं और वे मुश्किल से दो वक़्त का खाना खा पाते हैं। ऐसे में उनसे अपने माता-पिता के दस्तावेज़ की उम्मीद करना एक क्रूर मज़ाक है।’

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क्या हैं नए नियम?

जुलाई 1987 से पहले जन्मे लोगों के पास प्रमाण पत्र का विकल्प होना चाहिए। जुलाई 1987-दिसंबर 2004 के बीच जन्मे लोगों के पास अपने माता-पिता में से किसी एक का जन्म प्रमाण पत्र होना चाहिए। दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोगों के लिए माता-पिता के दस्तावेज अनिवार्य हैं।

चुनाव आयोग का लक्ष्य

चुनाव आयोग का लक्ष्य जून-जुलाई में घर-घर जाकर डेटा एकत्र करना है, लेकिन ओवैसी ने सवाल उठाया कि बिहार जैसे बड़े और कम विकसित राज्य में यह प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी। उन्होंने इस कदम को "चुनावों के करीब आते ही लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। संविधान हर भारतीय को वोट देने का अधिकार देता है। यह फैसला गरीबों को इस अधिकार से वंचित करेगा," ओवैसी ने चेतावनी दी।