रून्नीसैदपुर विधानसभा चुनाव 2025: क्या सीतामढ़ी की हॉट सीट पर पंकज मिश्रा दोबारा जीत दर्ज हासिल की है।  

Runni Saidpur Assembly Election 2025: सीतामढ़ी की चर्चित सीट रून्नीसैदपुर में अब तक तीन बार अलग-अलग दलों को जीत मिल चुकी है। 2025 का चुनाव यहां पंकज कुमार मिश्रा दोबारा कमाल खिलाया है।

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रुन्नीसैदपुर विधानसभा चुनाव 2025 का परिचय

बिहार के सीतामढ़ी जिले की रुन्नीसैदपुर विधानसभा सीट (Runni Saidpur Assembly Election 2025) हमेशा से राजनीतिक हलचल का केंद्र रही है। यहां के मतदाता बदलाव के पक्षधर माने जाते हैं। जातीय समीकरण, उम्मीदवारों की छवि और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दे हर चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं।

पिछले चुनावों का रिपोर्ट कार्ड

2010 रुन्नीसैदपुर विधानसभा चुनाव

 जेडीयू (JD(U)) की गुड्डी देवी ने आरजेडी (RJD) प्रत्याशी राम शत्रुघ्न राय को 10,759 वोटों से हराया।

  • गुड्डी देवी: 36,125 वोट
  • राम शत्रुघ्न राय: 25,366 वोट

2015 रुन्नीसैदपुर विधानसभा चुनाव

 आरजेडी (RJD) की मंगिता देवी ने रालोसपा (BLSP) के पंकज कुमार मिश्रा को 14,110 वोटों से शिकस्त दी।

  • मंगिता देवी: 55,699 वोट
  • पंकज कुमार मिश्रा: 41,589 वोट

2020 रुन्नीसैदपुर विधानसभा चुनाव

  •  जेडीयू (JD(U)) के पंकज कुमार मिश्रा ने आरजेडी (RJD) की मंगिता देवी को 24,629 वोटों से हराया।
  •  पंकज कुमार मिश्रा: 73,205 वोट
  •  मंगिता देवी: 48,576 वोट

जातीय समीकरण और चुनावी मुद्दे

यहां यादव, भूमिहार, ब्राह्मण और दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2025 में मुद्दे होंगे-

  •  शिक्षा व बेरोजगारी
  •  बाढ़ राहत और सड़कें
  •  स्वास्थ्य सेवाएं
  •  किसानों का कर्जा और आजीविका

प्रत्याशियों की शिक्षा, संपत्ति और आपराधिक रिकॉर्ड भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करेंगे।

2025 में रुन्नीसैदपुर विधानसभा चुनाव की संभावनाएं

  •  संभावना है कि जेडीयू से पंकज कुमार मिश्रा और आरजेडी से मंगिता देवी फिर से मैदान में उतरें।
  •  पंकज मिश्रा की पहचान एक अनुभवी नेता और संगठन के मजबूत स्तंभ के रूप में है। ग्रेजुएशन तक पढ़ाई करने वाले पकंज मिश्रा साफ सुथरी छवि वाले नेता हैं। उन पर कोई आपराधिक केस नहीं है। उनकी कुल संपत्ति 7.63 करोड़ रूप है और उन पर 51 लाख रुपए का कर्जा भी है।
  •  मंगिता देवी की छवि जनाधार वाले और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने वाली नेता के रूप में है।
  •  यहां का इतिहास बताता है कि मतदाता पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार की छवि और कामकाज पर भरोसा करते हैं।