बिहार चुनाव में कटिहार और कैमूर के किसान भैंस पर सवार होकर वोट देने पहुंचे। यह उनकी ग्रामीण पहचान और लोकतंत्र के प्रति उत्साह को दर्शाता है, जो साधनों की कमी के बावजूद कायम है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के बीच राज्य के विभिन्न ज़िलों से लोकतंत्र के पर्व की दिलचस्प और अनोखी तस्वीरें सामने आ रही हैं। कटिहार और कैमूर जिलों में युवा किसान अपनी ग्रामीण पहचान को दर्शाते हुए भैंस पर सवार होकर वोट डालने पहुंचे, जो स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इन किसानों ने यह संदेश दिया कि कठिन रास्ते या साधन की कमी भी उनके मतदान के उत्साह को कम नहीं कर सकती।

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कटिहार: 'पशु ही हमारे गाँव की पहचान'

लोकतंत्र की पहली अनोखी तस्वीर कटिहार के उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिरसा मतदान केंद्र से सामने आई। यहाँ के युवा किसान आनंद अपने पशु पर सवार होकर वोट देने पहुंचे। यह केंद्र उनके घर से करीब ढाई किलोमीटर दूर था।

रफ एंड टफ पर्सनालिटी वाले आनंद ने मीडिया से बात करते हुए बताया, "हमारी पहचान हमारे पशु से है, इसलिए उसी पर बैठकर वोट देने जा रहे हैं। लोकतंत्र का त्यौहार है, इसमें शामिल होना जरूरी है।"

ग्रामीणों ने इस दृश्य को गांव की वास्तविक संस्कृति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि कठिन रास्तों और कीचड़ भरे क्षेत्रों में भैंस ही सबसे मजबूत सहारा है, और आनंद का यह कार्य गाँव की संस्कृति को दर्शाता है। कई ग्रामीणों ने इस क्षण को मोबाइल कैमरे में कैद भी किया।

कैमूर: अधौरा में भी दिखी ऐसी ही तस्वीर

केवल कटिहार ही नहीं, कैमूर जिले के अधौरा में भी कुछ मतदाता भैंस पर सवार होकर मतदान केंद्र तक पहुंचे। कैमूर जिला के चैनपुर विधानसभा के अधौरा में भी यह अनोखी झलक देखने को मिली, जिसने लोकतंत्र के पर्व में एक नया रंग भर दिया।

बिहार चुनाव में नेताओं की जुबानी जंग और बड़े वादों के बीच, इन किसानों ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान का उत्साह और ग्रामीण जीवनशैली की सादगी आज भी बरकरार है।