समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी के दोनों हाथों की उंगलियों पर स्याही मिलने से विवाद हुआ। विपक्ष ने इसे 'डबल वोटिंग' का प्रयास बताया। वहीं, जिला प्रशासन ने इसे मानवीय भूल बताते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक बार ही वोट डाला है।

बिहार में चल रहे चुनावी महापर्व के बीच, समस्तीपुर की वर्तमान सांसद और प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार की सदस्य शांभवी चौधरी एक ऐसे विवाद के केंद्र में आ गई हैं, जिसने मतदान की प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उनके दोनों हाथों की तर्जनी उंगलियों पर चुनावी स्याही (Indelible Ink) के निशान पाए जाने का है, जिसे विरोधी दल 'डबल वोटिंग' के प्रयास और चुनावी आचार संहिता का घोर उल्लंघन बता रहे हैं।

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कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब सांसद शांभवी चौधरी पटना के बाँकीपुर विधानसभा क्षेत्र में वोट डालने के लिए पोलिंग बूथ नंबर-61 पर पहुंची थीं। मतदान के बाद जारी किए गए वीडियो फुटेज और तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा गया कि उनके बाएँ हाथ की तर्जनी के अलावा, दाहिने हाथ की तर्जनी पर भी स्याही का निशान लगा हुआ था। चुनावी नियम 1961 के नियम 49K के तहत, स्याही हमेशा मतदाता के बाएँ हाथ की तर्जनी पर लगाई जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी व्यक्ति दोबारा मतदान न कर पाए। दो अलग-अलग उंगलियों पर निशान दिखने से यह विवाद तुरंत राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

जिलाधिकारी का स्पष्टीकरण: मानवीय त्रुटि

विवाद बढ़ते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। पटना के जिलाधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी ने तुरंत इस मामले में पीठासीन अधिकारी से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा। अपनी जाँच के बाद, जिलाधिकारी कार्यालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की।

प्रशासनिक जाँच में बताया गया कि यह मामला किसी धांधली का नहीं, बल्कि 'मानवीय त्रुटि' (Human Error) का है। पोलिंग बूथ पर तैनात एक नए या अनभिज्ञ मतदान कर्मचारी ने गलती से सांसद चौधरी के दाहिने हाथ की तर्जनी पर स्याही लगा दी। जब इस गलती को पहचाना गया, तो पीठासीन अधिकारी ने हस्तक्षेप किया और नियम का पालन करते हुए, बाएँ हाथ की तर्जनी पर भी सही ढंग से स्याही का निशान लगाया गया। जिलाधिकारी ने दृढ़ता से कहा कि फॉर्म 17-A (मतदाता रजिस्टर) की गहन जाँच से यह पुष्टि होती है कि सांसद ने मतदाता सूची क्रमांक 275 पर केवल एक बार ही अपना वोट दर्ज किया है।

विपक्षी दलों का तीखा राजनीतिक हमला

प्रशासनिक सफाई को विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के दलों, विशेषकर कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD), ने सिरे से खारिज कर दिया। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह चूक नहीं, बल्कि जानबूझकर चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने का प्रयास था, जिसकी आड़ में कोई बड़ा घोटाला हो सकता था।

RJD के प्रवक्ता ने इस घटना को 'लोकतंत्र के इतिहास में अभूतपूर्व फ्रॉड' बताते हुए दावा किया कि सत्तारूढ़ गठबंधन के लोग चुनाव जीतने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। उन्होंने जारी किए गए वीडियो में सांसद के पिता और जद (यू) के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी की कथित भाव-भंगिमाओं (eye gestures) पर भी सवाल उठाए, जो मतदान बूथ के पास मौजूद थे, और आरोप लगाया कि यह सब एक सुनियोजित प्रयास का हिस्सा था।

कांग्रेस पार्टी ने इसे 'नियमों का उपहास' और 'लोकतंत्र की धज्जियाँ उड़ाने' जैसा कृत्य बताया। उनका तर्क है कि अगर यह सिर्फ एक गलती थी, तो चुनावी प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है, जो मतदान की पवित्रता को सीधे प्रभावित करती है।