बस्तर प्रशासन ने 611 गांवों में विशेष अभियान चलाकर 8,241 फौती नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया, जिससे किसानों और आदिवासियों को बड़ी राहत मिली।

​रायपुर। किसी भू-स्वामी की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों के नाम जमीन दर्ज कराने की प्रक्रिया, जिसे फौती नामांतरण कहा जाता है, लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में एक जटिल प्रशासनिक कार्य माना जाता रहा है। जानकारी की कमी, लंबी कानूनी प्रक्रिया और बिचौलियों की सक्रियता के कारण ऐसे कई मामले वर्षों तक लंबित रहते हैं। इससे परिवारों में विवाद बढ़ते हैं और कृषि गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर जिले ने एक ऐसा प्रशासनिक मॉडल विकसित किया है, जो सुशासन का उदाहरण बनकर सामने आया है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

Proactive Governance Model: प्रशासन खुद पहुंचा लोगों के द्वार

सामान्यतः राजस्व विभाग में नामांतरण की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब प्रभावित परिवार स्वयं आवेदन लेकर कार्यालय पहुंचता है। बस्तर जिला प्रशासन ने इस पारंपरिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए सक्रिय पहल की। जिला प्रशासन ने निर्णय लिया कि पात्र लोगों तक पहुंचने की जिम्मेदारी स्वयं प्रशासन निभाएगा। इसी सोच के साथ विशेष अभियान शुरू किया गया, जिसके तहत गांव-गांव जाकर फौती नामांतरण से जुड़े लंबित मामलों की पहचान की गई। 12 जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मात्र चार महीनों में 611 गांवों से जानकारी एकत्र कर बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निराकरण किया गया और भूमि अभिलेखों को अद्यतन किया गया।

Revenue Department Teamwork: प्रशासनिक समन्वय ने बदली तस्वीर

इस अभियान की सफलता के पीछे केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की मजबूत भागीदारी रही। पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया गया। तहसीलदार और नायब तहसीलदार लगातार निगरानी करते रहे और समय-सीमा के भीतर कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर आदेश जारी किए। वहीं मैदानी स्तर पर सचिव, पटवारी और कोटवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

Gram Panchayat Secretary की भूमिका: 17 हजार से अधिक मृतकों का डेटा तैयार

ग्राम सचिवों ने जन्म एवं मृत्यु पंजीयन संबंधी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए पिछले चार वर्षों में मृत हुए 17,405 लोगों की सूची तैयार की। जहां मृत्यु प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं थे, वहां संबंधित परिवारों को प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए गए। कई मामलों में विलंबित पंजीयन की अनुमति प्राप्त कर नए प्रमाण-पत्र भी जारी कराए गए, जिससे आगे की प्रक्रिया आसान हो सकी।

Bhuiyan Portal और Patwari Network से मिली बड़ी मदद

ग्राम सचिवों से प्राप्त जानकारी को पटवारियों ने छत्तीसगढ़ के डिजिटल भूमि अभिलेख पोर्टल 'भुइयां' से मिलान किया। इस प्रक्रिया में 8,651 ऐसे मृत भू-स्वामियों की पहचान हुई जिनके नाम पर भूमि दर्ज थी। इसके बाद पटवारियों ने परिवारों से संपर्क कर आवश्यक आवेदन लिए और उत्तराधिकारियों का वंश वृक्ष तैयार किया। इससे नामांतरण की प्रक्रिया को गति मिली और कानूनी जटिलताएं कम हुईं।

Social Verification: कोटवारों ने सुनिश्चित की पारदर्शिता

अभियान की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कोटवारों ने गांव स्तर पर सामाजिक सत्यापन की जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने मृत व्यक्तियों की सूची और तैयार किए गए वंश वृक्ष का भौतिक सत्यापन किया। इससे फर्जी दावों और गलत जानकारी की संभावना लगभग समाप्त हो गई और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रही।

Bastar Land Record Update: 611 गांवों में रिकॉर्ड स्तर पर कार्य

बस्तर जिले की 10 तहसीलों के 639 गांवों में से 611 गांव इस अभियान से जुड़े। इन गांवों में चिन्हित किए गए 8,651 आवश्यक मामलों में से 8,241 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण कर दिया गया। इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया, इश्तेहार प्रकाशन, दावा-आपत्ति और अंतिम आदेश की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। वर्तमान में केवल 410 मामले लंबित हैं।

Tokapal, Jagdalpur और Bakawand ने दिखाई सबसे बेहतर प्रगति

तोकापाल तहसील इस अभियान में सबसे आगे रही। यहां 1,553 मामलों की पहचान की गई, जिनमें से 1,454 मामलों का निराकरण किया गया। बकावण्ड तहसील ने 1,153 मामलों में से 1,142 मामलों को पूरा कर लगभग पूर्ण लक्ष्य हासिल कर लिया है। वहीं जगदलपुर तहसील ने 1,061 में से 1,057 मामलों का निपटारा कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। बस्तर तहसील में 1,087 मामलों में से 1,019 और भानपुरी में 1,018 मामलों में से 959 मामलों का समाधान किया गया।

दूरस्थ क्षेत्रों में भी दिखी प्रशासनिक सक्रियता

लोहण्डीगुड़ा तहसील ने 805 में से 799 मामलों का निराकरण किया, जबकि करपावण्ड और नानगुर ने भी अधिकांश मामलों को निर्धारित समय में पूरा किया। दुर्गम दरभा क्षेत्र में 484 में से 452 मामलों का समाधान किया गया। वहीं बास्तानार तहसील ने 381 मामलों में से 337 मामलों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

Farmers Benefit: KCC और सरकारी योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ

यह अभियान केवल भूमि रिकॉर्ड सुधारने तक सीमित नहीं है। इसके परिणामस्वरूप किसानों और आदिवासियों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे। भूमि अभिलेख अपडेट होने के बाद नए भू-स्वामी अब किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि अनुदान और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। डिजिटल ट्रैकिंग और स्वतः संज्ञान प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका भी लगभग समाप्त हो गई है, जिससे लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों से राहत मिली है।

अब 10 वर्षों के लंबित मामलों पर फोकस

चार वर्षों से लंबित मामलों के सफल निराकरण के बाद जिला प्रशासन अब अभियान के अगले चरण की तैयारी कर चुका है। अगले चरण में पिछले 10 वर्षों से लंबित फौती नामांतरण मामलों का शत-प्रतिशत निराकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

Bastar Governance Model: अन्य जिलों के लिए प्रेरणा

बस्तर का यह मॉडल केवल एक राजस्व अभियान नहीं, बल्कि सुशासन का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है। इस पहल ने साबित किया है कि संवेदनशील, परिणाम-केंद्रित और सक्रिय प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाकर जटिल समस्याओं का समाधान संभव है। राज्य के अन्य ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए यह मॉडल एक मार्गदर्शक पहल साबित हो सकता है, जहां आज भी राजस्व और भूमि अभिलेख संबंधी समस्याएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।