दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर खराब होने लगी है। इसे देखते हुए CAQM ने पूरे इलाके में GRAP का पहला चरण (Stage 1) लागू कर दिया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार प्रदूषण कम करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की हवा अब 'खराब' (Poor) श्रेणी में पहुंच गई है। इसे देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बुधवार को पूरे इलाके में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण यानी स्टेज-1 लागू कर दिया है। GRAP की सब-कमेटी ने आज एक बैठक की। इस बैठक में इलाके की हवा की स्थिति का जायजा लेने के बाद यह फैसला लिया गया। आदेश में बताया गया है, “20 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 179 था, जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है। लेकिन 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे यह तेजी से बढ़कर 244 हो गया, जो 'खराब' श्रेणी है। मौसम विभाग (IMD) और IITM के अनुमान के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी AQI 'खराब' ही रहने वाला है।” इसी वजह से सब-कमेटी ने तुरंत प्रभाव से पूरे एनसीआर में GRAP के स्टेज-1 के तहत आने वाले सभी नियम लागू करने का फैसला किया है।

आदेश में आगे कहा गया, “हवा को और ज्यादा खराब होने से बचाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां पूरे एनसीआर में स्टेज-1 के नियमों को सख्ती से लागू करेंगी और इसकी निगरानी करेंगी। सभी एजेंसियों को कड़ी नजर रखने को कहा गया है। साथ ही, आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे GRAP स्टेज-1 के तहत बनाए गए सिटिजन चार्टर का पूरी तरह से पालन करें।” सब-कमेटी हवा की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगी। दिल्ली की हवा और IMD/IITM के अनुमानों के आधार पर समय-समय पर हालात की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे के फैसले लिए जाएंगे।

वहीं, पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने पिछले दस सालों में राजधानी की बिगड़ती हवा पर चिंता जताई। सिरसा ने कहा, “पिछले 10-12 सालों में दिल्ली की हवा बहुत ज्यादा प्रदूषित हो गई है। पिछली सरकारें सिर्फ बहाने बनाती रहीं। कभी पंजाब को दोष दिया, तो कभी यूपी, हरियाणा या राजस्थान को। लेकिन उन 12 सालों में उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मैं बताना चाहता हूं कि इस साल हमने 214 दिन ऐसे देखे हैं जब हवा 'अच्छी' या 'मध्यम' रही। पिछले 12 सालों में यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। अगर हम कोविड वाले साल को छोड़ दें, तो यह 214 दिन का आंकड़ा 12 साल का रिकॉर्ड है। यह सब सरकार की कोशिशों और दिल्ली के लोगों के सहयोग से ही मुमकिन हो पाया है। हमने लंबे और छोटे, दोनों तरह के उपाय किए हैं। लंबे समय वाले उपायों में दिल्ली की सभी सड़कों से धूल हटाना, हर सड़क की पूरी तरह से कारपेटिंग (पक्की करना) और धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देना शामिल है।”