फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग पर इलाज में लापरवाही और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश पर जांच में खामियां मिलीं, अब अस्पताल पर कार्रवाई की तैयारी है। 

Fortis Hospital Shalimar Bagh: देश की राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली और अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की संवेदनशीलता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यह कहानी बी-8, गली नंबर 9, शालीमार विलेज के रहने वाले एक बेबस पिता श्री मिथिलेश झा (पिता: श्री रतिकान्त झा) की है, जिनका जवान बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। मिथिलेश झा ने रोते हुए बताया कि बीती 4 जून 2026 को शालीमार बाग के बीसी (BC) ब्लॉक के पास उनके बेटे, स्वर्गीय श्री सुनील झा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। लेकिन इस त्रासदी का सबसे खौफनाक पहलू तब शुरू हुआ, जब लहूलुहान सुनील को लेकर परिजन तत्काल पास के नामी 'फोर्टिस हॉस्पिटल' पहुंचे। पिता का आरोप है कि फोर्टिस अस्पताल समय पर इलाज देने में पूरी तरह नाकाम रहा, क्योंकि वहां मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ ने एक मरते हुए इंसान को देखने तक से इनकार कर दिया।

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'पहले काउंटर पर कैश जमा करो, फिर छुएंगे मरीज': फोर्टिस प्रशासन की अमानवीय जिद

जब सुनील झा जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था और उसकी सांसें उखड़ रही थीं, तब फोर्टिस हॉस्पिटल के प्रशासन ने सारी इंसानी हदें पार कर दीं। पीड़ित पिता श्री मिथिलेश झा ने अस्पताल पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए कहा कि इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ ने इलाज की बुनियादी प्रक्रिया तक शुरू नहीं की। अस्पताल प्रशासन का पूरा जोर इलाज शुरू करने से पहले काउंटर पर पैसे जमा कराने पर था। तीमारदार गिड़गिड़ाते रहे, डॉक्टर तमाशबीन बने रहे और कैश की रसीद कटने का इंतजार होता रहा। पिता का स्पष्ट कहना है कि यदि अस्पताल ने चंद रुपयों के लिए संवेदनहीनता न दिखाई होती और समय पर इलाज शुरू कर दिया होता, तो उनके बेटे सुनील झा की जान निश्चित तौर पर बचाई जा सकती थी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का औचक फरमान: डीएम स्तरीय जांच कमेटी का आधी रात को गठन

इस दर्दनाक और अमानवीय घटना की गूंज जब सत्ता के गलियारों तक पहुंची, तो शासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता और अस्पताल की असंवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने इसका कड़ा संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने बिना वक्त गंवाए तुरंत जिलाधिकारी (DM - नॉर्थ) को शालीमार बाग स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के कामकाज और इस पूरे मामले की मजिस्ट्रेट स्तरीय जांच करने का कड़ा आदेश जारी कर दिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस औचक निर्देश के बाद गुरुवार को विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों और डॉक्टरों की एक संयुक्त जिलाधिकारी स्तरीय समिति (जांच टीम) ने अचानक फोर्टिस अस्पताल पर धावा बोल दिया।

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रेड में खुली पोल: जांच टीम को मिलीं कई भयानक अनियमितताएं और गड़बड़ियां

जब मुख्यमंत्री के आदेश पर गठित जांच टीम ने फोर्टिस अस्पताल के भीतर जाकर फाइलों, सीसीटीवी फुटेज और इमरजेंसी वॉर्ड के रिकॉर्ड्स को खंगालना शुरू किया, तो वहां का नजारा बेहद चौंकाने वाला था। जांच टीम को अस्पताल के संचालन में एक या दो नहीं, बल्कि कई गंभीर अनियमितताएं और भारी गड़बड़ियां मिलीं। इलाज में लापरवाही बरतने से लेकर सरकारी नियमों को ताक पर रखने तक, फोर्टिस अस्पताल की पूरी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल में मरीजों के अधिकारों का हनन किया जा रहा था और इमरजेंसी मामलों को संभालने का उनका तरीका बेहद लचर और नियमों के खिलाफ था।

खत्म होगा फोर्टिस का लाइसेंस? शासन ने लिया सख्त कार्रवाई का अंतिम निर्णय

इस औचक निरीक्षण और शुरुआती जांच के बाद शासन ने फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ बेहद सख्त और दंडात्मक कार्रवाई करने का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, अस्पताल की ऐसी अमानवीय और असंवेदनशील कार्यप्रणाली के लिए संबंधित प्रबंधन के खिलाफ मिसाल बनने वाली कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में फोर्टिस के खिलाफ एक बेहद विस्तृत और पुख्ता जांच रिपोर्ट (Detailed Investigation Report) तैयार की जा रही है, जिसे सीधे मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कर दिया है कि दिल्ली में किसी भी नामी या बड़े अस्पताल को पैसे की खातिर किसी गरीब या लाचार की जिंदगी से खेलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अब देखना यह है कि इस 'खूनी लापरवाही' के बाद फोर्टिस अस्पताल पर ताला लटकता है या प्रशासन कोई और बड़ी कानूनी गाज गिराता है।