“हर कॉल पर निगरानी, हर कदम पर पाबंदी!” राधिका यादव मर्डर केस में दोस्त का चौंकाने वाला दावा टेनिस स्टार राधिका की करीबी दोस्त ने किया खुलासा: शॉर्ट्स पहनने, लड़कों से बात करने पर माता-पिता करते थे शर्मिंदा, कैमरे पर दिखानी पड़ती थी दोस्त की शक्ल!

Radhika Yadav murder: गुरुग्राम की 25 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। लेकिन इस सनसनीखेज मामले में अब नया मोड़ तब आया, जब राधिका की करीबी दोस्त और खुद एक टेनिस खिलाड़ी हिमांशिका सिंह राजपूत ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो शेयर किया और कुछ गंभीर आरोप लगाए।

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“कपड़े, दोस्त और आज़ादी– सब पर पाबंदी थी” 

हिमांशिका के मुताबिक, राधिका के माता-पिता, खासकर पिता दीपक यादव, हर छोटे-बड़े फैसले पर नियंत्रण रखते थे। शॉर्ट्स पहनना, लड़कों से बात करना या देर तक बाहर रहना – सब कुछ ‘गुनाह’ माना जाता था। "वह बहुत संकोची थी, ज्यादातर घर की बंदिशों की वजह से। हर बार वीडियो कॉल करते वक्त मुझे कैमरे में आकर यह साबित करना पड़ता था कि मैं ही बात कर रही हूं," हिमांशिका ने बताया।

“कैमरा से डरने लगी थी वो लड़की जो वीडियो बनाना पसंद करती थी” 

राधिका को पहले कैमरा और तस्वीरें लेना बहुत पसंद था। लेकिन हिमांशिका ने कहा कि धीरे-धीरे उसने खुद को सोशल मीडिया और बाहर की दुनिया से काट लिया। उसे डर था कि उसके वीडियो या तस्वीरें अगर माता-पिता तक पहुंच गईं, तो बवाल मच जाएगा।

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हर काम पर हिसाब देना, हर रिश्ते पर शक 

हिमांशिका ने यह भी खुलासा किया कि राधिका को अपने हर कदम का हिसाब देना पड़ता था। चाहे किसी दोस्त से मिलना हो या टेनिस कोर्ट पर समय बिताना, उसे पहले से घर पर सूचित करना होता था। "एक बार उसकी अकादमी सिर्फ 50 मीटर दूर थी, फिर भी उसे लेट होने की इजाज़त नहीं थी," उन्होंने कहा।

अफवाहों पर फुल स्टॉप: कोई सांप्रदायिक ऐंगल नहीं 

कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में लव जिहाद का एंगल जोड़ा जा रहा था, लेकिन हिमांशिका ने इन बातों को साफ तौर पर नकारा। “वह किसी से ज़्यादा मिलती-जुलती नहीं थी, अलग-थलग रहती थी। लोग बिना वजह इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।

क्या पाबंदियों ने ले ली एक होनहार बेटी की जान? 

पुलिस जांच में अब यह स्पष्ट हो रहा है कि राधिका की हत्या के पीछे घरेलू दबाव, समाजिक शर्म और मानसिक तनाव एक बड़ा कारण रहे हैं। टेनिस खिलाड़ी का सपना था विंबलडन खेलना, लेकिन घर के बंद दरवाज़ों के भीतर उसका हौसला दम तोड़ता रहा।