बेंगलुरु पुलिस ने 100 से अधिक मामलों में वांछित एक ऐसे सीरियल चोर एस समीर शर्मा को गिरफ्तार किया है, जो पेशे से शॉपकीपर था। फिंगरप्रिंट डेटाबेस ने 2015 से 2019 के बीच उसके अपराधों का खुलासा हुआ तो पुलिस भी अवाक रह गई। 

बेंगलुरू। । 7 नवंबर को एक घर से 5.6 लाख रुपये से अधिक की चोरी करने वाले एक चोर का पीछा करते हुए कारवार पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया जो कभी दुकानदार था। अधिकारियों को लगा कि संदिग्ध कोई अन्य चोर हो सकता है, लेकिन वे 2 करोड़ संदिग्धों के नमूनों वाले नेशनल डेटाबेस से उसके फिंगरप्रिंट का मिलान करने के बाद दंग रह गए। नतीजों से पता चला कि 2015 से 2019 के बीच अकेले बेंगलुरु में ही इस व्यक्ति ने 100 से ज़्यादा चोरियों को अंजाम दे डाला।

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30 NBW वारंट और 20 नोटिसों के जरिए घोषित था फरार अपराधी

इसके अलावा यह भी पता चला कि आरोपी के खिलाफ़ 30 नॉन-वैलेबल वारंट जारी किए गए थे और उसे 20 नोटिसों द्वारा फरार अपराधी घोषित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार 2019 से उस पर गोवा में 7 और पंजाब में चोरी के 5 मामले दर्ज किए गए थे। पुलिस ने उसकी पहचान बेंगलुरु के श्रीनगर के एस समीर शर्मा के रूप में की है। 40 वर्षीय यह व्यक्ति 2019 में शहर से लापता हो गया था।

उसने कभी रात में चोरी क्यों नहीं की?

समीर ने अपने एक दशक के चोरी के करियर में कभी रात में चोरी नहीं की। उसने इसका कारण यह बताया कि लोग रात में आप पर सबसे ज़्यादा शक करते हैं। "यह बहुत रिस्की होता है। लोग दिन के बजाय रात में आप पर ज़्यादा शक करते हैं। समीर ने पुलिस को बताया कि दिन के समय मैं रिहायशी इलाकों, पीजी आवासों या हॉस्टलों में घूमता रहता था, रहने के लिए जगह की तलाश करता था। चलते समय मैं खिड़कियों और कमरों पर नज़र रखता था, जहां से मैं घुस सकता था। बाद में मैं जो भी कीमती सामान पाता, उसे चुरा लेता था।

किसी के साथ नहीं करता था काम

उसका एक और नियम है कि वह कभी किसी के साथ काम नहीं करता। वह एक 'अकेला भेड़िया' है। एक अधिकारी ने कहा, "जेल में रहने के दौरान समीर ने शायद ही कभी दूसरे कैदियों से बातचीत की हो। उसने कभी अपने बारे में कुछ भी किसी से शेयर नहीं किया, क्योंकि वह किसी पर भरोसा नहीं करता था।" करवार के एसपी एम नारायण ने बताया कि उन्होंने समीर की गिरफ़्तारी और अन्य डिटेल के बारे में बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त बी दयानंद से संपर्क किया है।

 कभी दुकान चलाता था समीर

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वह 2010 में श्रीनगर में इलेक्ट्रिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाता था, लेकिन इनकम से संतुष्ट नहीं था। एक दिन राजस्थान से उसका एक दोस्त, जिसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट चुराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, ने उसे बताया कि जल्द ही लैपटॉप और मोबाइल फोन की बड़ी मांग होगी। 

इलेक्ट्रानिक गैजेट्स की ज्यादा करता था चोरी

समीर को एहसास हुआ कि खिड़कियों के माध्यम से टेबल से लैपटॉप चुराना या हॉस्टल और पीजी आवासों में खुले दरवाजों से घुसकर मोबाइल फोन छीनना आसान होगा। "इस तरह समीर एक चोर बन गया, लेकिन असामान्य व्यवहार के साथ। उसने कभी किसी के साथ मेलजोल नहीं बढ़ाया, कभी किसी पर भरोसा नहीं किया। वह हमेशा अकेले काम करता था और चोरी के पैसे अलग-अलग शहरों में जाकर खर्च करता था।

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