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गुजरात के इन गांवों को देखकर आपको शहर लगने लगेगा फीका, आधुनिकता के साथ बड़े-बड़े काम भी कर रहे ये विलेज
गांधीनगर (gandhinagar). गुजरात प्रदेश में केवल शहर ही नहीं यहां के गांव भी ऐसे विकसित हुए है कि यहां की सुविधाएं और अनूठे पन को देखकर एक बार तो आप हैरान ही हो जाओगे। ये गांव विकास के साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने पर भी काम कर रहे हैं।
पुंसरी गांव
पहले गुजरात इसके बाद देशभर में आदर्श गांव बनने वाला अपने इस सिद्धांत के चलते देश भर में फेमस है जो है- गांव का पानी गांव में , गांव की बात गांव में और गांव का रोजगार गांव में ही। गांव में एसी स्कूल, बायोगैस के प्लांट पूरे गांव में सीसीटीवी की सुविधा है इसके साथ ही प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्र है।5 हजार लोगों की आबादी वाले इस गांव के शहरी तरह से विकास का क्रेडिट सरपंच हिमांशु पटेल के दिया जाता है। इस गांव के मॉडल को अपनाने के लिए राजस्थान से लेकर देश के अन्य राज्यों और विदेशों के भी कई प्रतिनिधि मंडलों ने दौरा किया है।
कुनारिया गांव- लगान गांव
देश का ऐसा गांव जहां शूट हुई हिट बॉलीवुड फिल्म लगान। इसने पूरे गांव को इतना फेमस कर दिया कि लोग इसे अपने नाम कुनारिया गांव की जगह लगान गांव से जानने लगे। इस गांव को लोग अपने इस फेम से आगे निकल बड़े काम करने लगे है। दरअसल गांव में पिछले 5 सालों में 1.5 लाख से अधिक पौधे लगाने के साथ ही अब 3 गीगावॉट का सोलर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए एक कंपनी से बात चल रही है। गांव के सरपंच ने बताया कि गांव के लोग इसके लिए सहमत भी है। इसके साथ ही यह गांव बालिका वधू टीवी सीरियल से इंस्पायर होकर गांव में बालिका पंचायत का चुनाव संपन्न करा चुका है।
भीमासर गांव- भूकंप झेलने के बाद भी बना मॉडल विलेज
8 हजार लोगों की आबादी वाले इस गांव की किस्मत साल 2001 में आए भूंकप के बाद बदली। इस गांव में सभी पक्के मकान, आंगनवाड़ी, पंचायत घर, बैंक डाकघर, एंबुलेंस सुविधा के साथ गांव का पूरा रास्ता हरियाली से भरा हुआ है। गांव में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा है जो पानी को ट्रीट करने के बाद बेचता है और लाखों की कमाई करता है।
जेठीपुरा गांव
सौ सालों से ज्यादा पुराने गांवों में शामिल ये गांव आज के आदर्श और स्मार्ट गांव में शामिल है। यहां पक्के रास्ते, पानी निकासी की सीवेज की सुविधा, फुल इलेक्ट्रीसिटी, हर गली मौहल्ले में लगी स्ट्रीट लाइट लगी है। शहरों में जहां पानी की किल्लत रहती है वहीं इस गांव के हर घर में पानी की 24 घंटे सुविधा उपलब्ध रहती है। इस गांव ने प्रदेश के हरित स्कूलों के साथ स्वच्छ गांव में राष्ट्रीय पुरुस्कार भी जीता हुआ है। लोगों की खरीददारी के लिए अपना रिटेल स्टोर है।
धर्मज गांव- एनआरआई विलेज
गुजरात के आणंद जिले स्थित इस गांव को लोग एनआरआई विलेज के नाम से भी जानते है। इसका कारण है इस गांव के हर घर से कोई ना कोई व्यक्ति विदेश में रहता है। इतना ही नहीं इस गांव में आने के बाद आपको लगेगा की आप किसी विदेशी गांव में आ गए है। यहां आपको पक्के रास्ते, साफ सुथरी गलियां साथ ही उन पर महंगी और लक्जरी गाड़िया देखने को मिल जाएगी। पर इसके कारण ही नहीं बल्कि इस गांव को बंजर जमीन में चारागाह उगाने के लिए जाना जाता है। धर्मज गांव के मॉडल से प्रभावित होकर देश के पीएम ने इसे अन्य गांवों को फॉलों करने के लिए मोटिवेट किया था।
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