झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे गुमला के ओम प्रकाश साहू की कहानी बेहद प्रेरक है। उन्होंने हथियार डालकर मछली पालन शुरू किया। अपने साथ कई और लोगों का जीवन बदला। उनकी पहले के चलते आज बासिया प्रखंड के 170 परिवार मछली पालन से जुड़े हैं।

Independence Day 2025: 15 अगस्त 2025 को हम 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले हैं। आज भारत दुनिया की बड़ी ताकत है। चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारी इस कामयाबी में हजारों ऐसे नायकों का बड़ा योगदान है जो न सिर्फ खुद कामयाबी की बुलंदी छू रहे हैं, बल्कि दूसरे लोगों को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी जिंदगी संवार रहे हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं ओम प्रकाश साहू।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

झारखंड के गुमला जिला के बासिया प्रखंड के कुम्हारी गांव के ओम प्रकाश साहू कभी हिंसा के रास्ते पर चल रहे थे। उनके इलाके में नक्सलियों का वर्चस्व था। बाद में उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ा और मछली पालन शुरू किया। उनके इस प्रयास का असर हुआ। कई और लोग जो पहले बंदूक थामे थे उन्होंने मछली का जाल उठा लिया।

ओम प्रकाश साहू के लिए आसान नहीं था बदलाव

हिंसा छोड़कर मछली पालन करना ओम प्रकाश साहू के लिए आसान नहीं था। कुछ लोगों ने उनका विरोध किया, धमकियां दी, लेकिन ओम प्रकाश का हौसला कम नहीं हुआ। उनके प्रयास का असर है कि आज बासिया प्रखंड के 150 से ज्यादा परिवार मछली पालन कर रहे हैं। यहां के जो लोग कभी नक्सली हुआ करते थे आज मछली पालकर अपना परिवार चला रहे हैं और देश व राज्य को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

कभी थी पैसे की तंगी आज 20 तालाबों में पाल रहे मछली

ओम प्रकाश साहू को मछली पालन के क्षेत्र में कामयाब होने में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से लाभ मिला। इस योजना के तहत उन्हें ट्रेनिंग दी गई। सिखाया गया कि कैसे मछली का पालन होगा। किन बातों का ध्यान रखना होगा। यह सीख रंग लाई। कभी ओम प्रकाश को पैसे की तंगी में जीना पड़ता था। परिवार चलाने में परेशानी होती थी। आज वह 20 तालाबों में मछली पार रहे हैं। सालाना लाखों रुपए का व्यापार कर रहे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो प्रोग्राम मन की बात में ओम प्रकाश द्वारा किए गए काम का जिक्र किया है।