झारखंड खूंटी में 14 साल की नाबालिग लड़की ने लिव-इन रिलेशनशिप में 16 वर्षीय लड़के के साथ बच्ची को जन्म दिया। स्कूल छोड़ना, आदिवासी परंपरा और कम उम्र की गर्भावस्था… आखिर यह रहस्य कैसे हुआ संभव?

Jharkhand Minor Girl Birth: झारखंड के खूंटी जिले में एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की ने अपने से दो साल बड़े लड़के के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में बच्ची को जन्म दिया। यह मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि आदिवासी परंपरा के तहत लड़की अपने माता-पिता की सहमति से लड़के के साथ रह रही थी।

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अधिकारियों में क्यों मच गया हड़कंप?

अधिकारी बताते हैं कि मामला तब और गंभीर हो गया जब लड़की को केवल सात महीने की गर्भावस्था में सदर अस्पताल में बच्ची का जन्म हुआ। प्रशासन ने बाल विवाह और कम उम्र में गर्भधारण को रोकने के लिए अपने अभियान को तेज कर दिया है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी अल्ताफ खान ने बताया कि NGO और नागरिक समाज के साथ मिलकर पूरे जिले में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

लिव-इन रिलेशनशिप में नाबालिग क्यों हुई गर्भवती?

केओरा पंचायत के एक गाँव की नाबालिग लड़की पढ़ाई के लिए मुरहू से 14 किलोमीटर दूर किराए के मकान में रह रही थी। वहीं उसकी मुलाक़ात पड़ोसी गाँव के 16 वर्षीय लड़के से हुई। दोनों के बीच संबंध बन गए और लड़की गर्भवती हो गई। यह मामला बाल विवाह और कम उम्र में गर्भधारण के सैद्धांतिक और सामाजिक परिणाम को सामने लाता है।

आदिवासी परंपरा और ढुकू का क्या महत्व है?

अधिकारी बताते हैं कि आदिवासी परंपरा के तहत 'ढुकू' रिलेशनशिप स्वीकार्य है, यानी माता-पिता की सहमति से लड़के के साथ लड़की रह सकती है। हालांकि इस मामले ने नाबालिगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है।

प्रशासन ने क्या कदम उठाए?

बाल संरक्षण अधिकारी अल्ताफ खान ने कहा कि प्रशासन नाबालिगों को शिक्षित करके, गर्भावस्था के स्वास्थ्य, मानसिक और सामाजिक परिणाम के बारे में जागरूक करेगा। 86 ग्राम पंचायतों में अभियान तेज किया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

स्वास्थ्य और स्कूल की स्थिति क्या है?

लड़की और बच्ची दोनों स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक हैं। अस्पताल में उन्हें निगरानी में रखा गया है। लड़की अब स्कूल नहीं जाती, जबकि लड़का अपनी माँ के साथ रहता है। यह घटना शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के महत्व को और उजागर करती है। प्रशासन का जागरूकता अभियान इस दिशा में कदम है, लेकिन समुदाय और परिवारों को भी इस मुद्दे पर सहयोग करना होगा ताकि भविष्य में नाबालिगों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित हो सके।