मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है। गेहूं खरीदी लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन, 4 गुना मुआवजा, 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन, सोलर पंप और उड़द बोनस जैसी योजनाओं से अन्नदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी।

मध्यप्रदेश की राजनीति और विकास की धुरी अगर किसी के इर्द-गिर्द घूमती है, तो वह है किसान। खेतों में पसीना बहाने वाला अन्नदाता ही राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसी भावना को फिर से मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों के सामने अपना स्पष्ट संदेश रखा, सरकार हर हाल में किसानों के साथ खड़ी है।

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24 अप्रैल को सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को नमन करते हुए कहा कि उनकी सरकार का संकल्प केवल घोषणा करना नहीं, बल्कि “सच्चा वादा, पक्का काम” है। उन्होंने साफ कहा कि बिना किसान के प्रदेश के सर्वांगीण विकास की कल्पना अधूरी है और सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

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किसानों की मेहनत को मिला बड़ा सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन को देखते हुए केंद्र सरकार से खरीदी सीमा बढ़ाने का आग्रह किया गया था। अब गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह 22 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत का सम्मान है। इससे किसानों की आय को स्थिरता मिलेगी और समर्थन मूल्य पर अधिक उपज की खरीदी संभव हो सकेगी। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार भी व्यक्त किया।

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गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग पूरी तरह खुली

सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया कि अब प्रदेश के सभी छोटे और बड़े किसानों के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने की स्लॉट बुकिंग पूरी तरह खोल दी गई है। अब गेहूं खरीदी सप्ताह में 6 दिन होगी और शनिवार को भी अवकाश नहीं रहेगा। इतना ही नहीं, 30 अप्रैल तक निर्धारित स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 9 मई कर दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसान भाइयों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, यह सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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भूमि अधिग्रहण पर किसानों को 4 गुना तक मुआवजा

भू-अर्जन को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब किसानों को उनकी भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। सरकार चाहती है कि विकास कार्यों के साथ किसानों के अधिकारों की भी पूरी रक्षा हो।

उड़द पर बोनस, सरसों पर राहत

किसानों की आय बढ़ाने के लिए दलहन और तिलहन फसलों पर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उड़द की खरीदी तय समर्थन मूल्य पर की जाएगी और इसके अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाएगा। वहीं, सरसों पर भावांतर योजना लागू होने के बाद बाजार में बेहतर कीमत मिल रही है। किसानों को एमएसपी से अधिक दाम मिलने लगे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

सिर्फ 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन

मुख्यमंत्री ने बताया कि देश में पहली बार किसानों को केवल 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही कृषक मित्र योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि किसानों को रात के बजाय दिन में पर्याप्त बिजली मिले और वे बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बन सकें। यह कदम सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ खेती की लागत कम करने में भी मदद करेगा।

मध्यप्रदेश बनेगा ‘मिल्क कैपिटल’

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार कृषि के साथ-साथ पशुपालन को भी किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बना रही है। प्रदेश में 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है और प्रतिदिन दूध संकलन 10 लाख किलोग्राम से अधिक पहुंच चुका है। दूध उत्पादक किसानों को 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। अब किसानों को प्रति किलो दूध पर 8 से 10 रुपये अधिक दाम मिल रहे हैं। सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश का “मिल्क कैपिटल” बनाना है।

खाद और उर्वरक की उपलब्धता पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता 5.90 लाख मीट्रिक टन है, जो पिछले वर्ष से भी अधिक है। अन्य उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडारण किया गया है। तकनीक और नवाचार के जरिए अब किसानों को बिना लंबी लाइन में लगे, सुविधाजनक स्थानों से खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

“किसान की समृद्धि ही प्रदेश की ताकत”

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश के अंत में कहा कि किसानों की मेहनत, उनका पसीना और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के निर्माण में मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी रहेगी और किसान कल्याण वर्ष को ऐतिहासिक बनाएगी। स्पष्ट है कि इस बार सरकार केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि जमीन पर भरोसा मजबूत करने की कोशिश में है। “सच्चा वादा, पक्का काम” का यह संदेश अब किसानों की उम्मीदों से सीधे जुड़ चुका है।

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