सीएम मोहन यादव ने जबलपुर में राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने जनजातीय नायकों के जीवन पर फिल्में बनाने और सरकार के सहयोग की बात कही।
जबलपुर में 18 सितंबर को एक ऐसा ऐलान हुआ, जो मध्य प्रदेश के जनजातीय इतिहास को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस समारोह में कहा कि जनजातीय महापुरुषों और बलिदानियों के जीवन पर फिल्में बनाई जानी चाहिए और सरकार इसमें पूरा सहयोग करेगी।
शंकर शाह-रघुनाथ शाह को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने जबलपुर में राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उन्होंने दोनों जननायकों के बलिदान और उनके योगदान को याद किया। 18 सितंबर को मध्य प्रदेश में दोनों के शहीदी दिवस के रूप में दर्ज किया गया है। सीएम यादव ने कहा कि राजा शंकर शाह ने 1857 के दौर में गीतों और कविताओं के जरिए लोगों में आजादी की चेतना जगाई। उनके बेटे रघुनाथ शाह ने भी इस अभियान को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने इसे उस दौर में तलवार की जगह कलम के जरिए संघर्ष का उदाहरण बताया।
यह भी पढ़ें: कूनो में हुआ बड़ा कमाल! 4 नन्हे मेहमानों के आते ही भारत में 56 हुआ चीतों का कुनबा
अंग्रेजों के सामने नहीं झुके पिता-पुत्र
मुख्यमंत्री के मुताबिक, अंग्रेजों ने दोनों को गिरफ्तार किया और उनके सामने सत्ता के आगे झुकने समेत कई शर्तें रखीं, लेकिन उन्होंने इन्हें स्वीकार नहीं किया। इसके बाद दोनों को अंग्रेजी शासन ने तोप के सामने खड़ा कर मृत्युदंड दिया। इस बलिदान को आज भी जनजातीय समाज के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
पाठ्यक्रम से फिल्मों तक सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय नायकों की गौरवगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती जैसे महापुरुषों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। अब उनके जीवन पर फिल्में बनाने में भी सरकार सहयोग करेगी।
सीएम यादव ने जनजातीय समाज से जुड़े सिकल सेल के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस दिशा में अभियान चलाया गया है। साथ ही उन्होंने रानी दुर्गावती लोक, टंट्या मामा के नाम पर खरगोन विश्वविद्यालय और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर विश्वविद्यालय जैसे कदमों का उल्लेख किया।
यह भी पढ़ें: Pakistan Blast: मस्जिद में चल रही थी जुमे की नमाज, अचानक जोरदार ब्लास्ट से बिखर गईं लाशें
