Strange Monsoon Ritual in Dhar: धार के खिलेड़ी गांव में बारिश के लिए निकली जिंदा इंसान की शव यात्रा! डीजे पर घुमाया गया गांवभर, गधे पर उल्टा बिठाया गया युवक! क्या इस रहस्यमयी टोटके से खुश होंगे इंद्रदेव? मान्यता या अंधविश्वास?

Monsoon Rain Totka MP: मध्यप्रदेश के धार जिले के खिलेड़ी गांव में पिछले कई हफ्तों से बारिश नहीं हुई। मानसून की बेरुखी ने किसानों की नींद उड़ा दी है, खेत सूख रहे हैं और जल संकट विकराल होता जा रहा है। ऐसे में इंद्र देव को मनाने के लिए गांववालों ने उठाया एक अजीब लेकिन परंपरागत कदम-एक जिंदा आदमी की शव यात्रा निकाली गई, और वो भी पूरे सम्मान के साथ।

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जिंदा आदमी की निकली शव यात्रा…और DJ की धुन पर घूमा पूरा गांव- क्यों?

गुरुवार को गांव में एक युवक को खाट पर लिटाकर, उसे सफेद कपड़ों में लपेटकर पूरे गांव में शव यात्रा निकाली गई। यह यात्रा साधारण नहीं थी-DJ बज रहा था, गांव के लोग पीछे-पीछे चल रहे थे और माहौल बिल्कुल किसी अंतिम यात्रा जैसा था। खास बात यह रही कि युवक पूरी तरह जीवित था, परंपरा के अनुसार उसने इस अनोखे रिवाज़ को निभाया।

उल्टे गधे की सवारी की क्या है मान्यता?

इतना ही नहीं, एक अन्य ग्रामीण को गधे पर उल्टा बैठाया गया और उसे भी पूरे गांव में घुमाया गया। मान्यता है कि इस तरह इंद्रदेव का ध्यान आकर्षित होता है और वे कृपा स्वरूप वर्षा करते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि यह टोटका वर्षों से अपनाया जाता रहा है और अबकी बार भी असर जरूर करेगा।

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क्या यह आस्था है या अंधविश्वास? 

इस पूरी घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। एक वर्ग इसे ग्रामीण आस्था और परंपरा का प्रतीक बता रहा है, तो दूसरा इसे साफ तौर पर अंधविश्वास मानता है। हालांकि, गांव के बुजुर्गों का कहना है, "जब विज्ञान फेल हो जाए, तब पुरानी परंपराएं ही उम्मीद देती हैं।"

फसलें सूखने की कगार पर, टोटके में बंधी आस 

गांव के किसान परेशान हैं, क्योंकि यदि अब भी बारिश नहीं हुई, तो फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। ऐसे में यह अनोखी पहल कहीं न कहीं एक आखिरी उम्मीद की तरह देखी जा रही है।

परंपरा, आस्था और संकट में जूझता गांव 

धार का यह मामला न केवल एक परंपरा को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि जलवायु संकट किस हद तक ग्रामीणों को अपनी जड़ों की ओर लौटने पर मजबूर कर रहा है। इंद्रदेव की कृपा होगी या नहीं, ये तो समय बताएगा, पर खिलेड़ी गांव ने एक बार फिर बता दिया कि गांवों की परंपराएं अब भी जीवित हैं।