मध्यप्रदेश के इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने किसानों को विकास का भागीदार बनाने का बड़ा संदेश दिया। 2360 करोड़ की इस परियोजना में किसानों को 60% विकसित भूखंड लौटाए जाएंगे।
मध्यप्रदेश अब केवल कृषि प्रधान राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। तेजी से बदलते आर्थिक परिदृश्य में राज्य खुद को उद्योग, निवेश और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है।
3 मई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2360 करोड़ रुपये की लागत वाले इस मेगा प्रोजेक्ट के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया। इंदौर के नैनोद गांव में आयोजित कार्यक्रम में केवल विकास की बातें ही नहीं हुईं, बल्कि किसानों की भागीदारी को लेकर ऐसा मॉडल सामने आया, जिसे सरकार “भाग्योदय का शंखनाद” बता रही है।

सबसे बड़ी बात यह रही कि इस परियोजना में किसानों को सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि विकास का साझेदार बनाया गया है। सरकार अधिग्रहित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा विकसित भूखंड के रूप में किसानों को वापस लौटाएगी। यही वजह है कि कई किसान अब करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक बन गए हैं।
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किसानों को मिला 4 गुना मुआवजा, करोड़ों के प्लॉट के बने मालिक
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत हल भेंट कर और मुकुट पहनाकर किया। किसानों ने भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति पत्र भी सरकार को सौंपे। सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत किसानों को उनकी जमीन का चार गुना तक मुआवजा दिया गया है। साथ ही विकसित भूखंड लौटाने की नीति ने किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदलने की संभावना पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की स्थिति में किसानों को लगभग 650 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट मिले हैं। उन्होंने इसे देश में अपनी तरह का अनोखा मॉडल बताया, जहां किसान केवल जमीन देने वाले नहीं बल्कि विकास के साझेदार बन रहे हैं।

क्या है इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर?
यह परियोजना सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक लगभग 20.28 किलोमीटर लंबा मार्ग विकसित करने की योजना है। इसके तहत करीब 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक औद्योगिक और शहरी विकास किया जाएगा। कॉरिडोर पर 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और उसके दोनों ओर बफर जोन विकसित किए जाएंगे ताकि भविष्य में बढ़ती जरूरतों के अनुसार विस्तार किया जा सके। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 को बेहतर तरीके से जोड़ते हुए औद्योगिक परिवहन को अधिक तेज और सुगम बनाएगी।
उद्योग, रोजगार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार
सरकार का दावा है कि इस कॉरिडोर से एग्री प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। इससे इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित होंगे और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत मध्यप्रदेश तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में पहले ही 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जा चुके हैं और करीब 9 लाख करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश के उन राज्यों में शामिल है जहां सबसे तेजी से उद्योग स्थापित हो रहे हैं।

किसानों को विकास में भागीदार बनाने का मॉडल
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यदि सरकार किसी किसान से जमीन लेती है, तो उसकी स्थायी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार किसी परियोजना में किसानों को 60 प्रतिशत विकसित भूमि लौटाने जैसा कदम उठाया गया है। इससे किसान आने वाले वर्षों में औद्योगिक और शहरी विकास का सीधा लाभ उठा सकेंगे। यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है क्योंकि इसमें भूमि अधिग्रहण को केवल मुआवजे तक सीमित नहीं रखा गया है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को बिजली, सिंचाई और फसल खरीद जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता था। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार किसानों को दिन में बिजली, बेहतर सिंचाई और समर्थन मूल्य पर खरीद की सुविधा दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है और किसानों को 2625 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि उड़द की खेती करने वाले किसानों को 600 रुपये बोनस दिया जाएगा।
इंदौर बनेगा निवेश और विकास का बड़ा केंद्र
सरकार का मानना है कि यह इकोनॉमिक कॉरिडोर केवल सड़क परियोजना नहीं बल्कि भविष्य का विकास मॉडल है। इससे इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन, धार, देवास और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ते हुए एक बड़े मेट्रोपॉलिटन नेटवर्क का निर्माण होगा। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे “देश की सर्वश्रेष्ठ योजना” बताते हुए कहा कि इस परियोजना से लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा और ग्रीन इंडस्ट्री का विकास होगा। मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी इसे मध्यप्रदेश के विकास और औद्योगिक प्रगति की नई शुरुआत बताया।

क्यों खास माना जा रहा है यह प्रोजेक्ट?
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह एक साथ कई क्षेत्रों पर असर डाल सकता है, उद्योग, रोजगार, कृषि, परिवहन और शहरी विकास। सबसे अहम बात यह है कि इसमें किसानों को विरोधी पक्ष नहीं बल्कि साझेदार बनाया गया है। यही कारण है कि सरकार इसे केवल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि “भाग्योदय का शंखनाद” कह रही है।
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