अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस 2025: अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर CM मोहन यादव ने बुजुर्गों की सेवा और सम्मान का संदेश दिया। क्या आप जानते हैं कि मध्यप्रदेश में 15.75 लाख बुजुर्ग हर महीने 600 रुपये पेंशन पा रहे हैं?   

भोपाल: अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से बुजुर्गों की नि:स्वार्थ सेवा और सम्मान के लिए संकल्पित होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धजन समाज, परिवार और राष्ट्र की रीढ़ हैं। उनके अनुभव, ज्ञान और संस्कार युवा पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहते हैं।

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बुजुर्ग समाज के आधार क्यों हैं?

मुख्यमंत्री ने बताया कि वृद्धजन किसी भी संस्कृति और समाज के मजबूत स्तंभ होते हैं। उनके अनुभवों और जीवन की सीख से युवा और बच्चों को सही दिशा मिलती है। डॉ. यादव ने बुजुर्गों को “देवतुल्य” बताते हुए उनका सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वृद्धजन का सम्मान करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है।

मध्यप्रदेश में पेंशन योजना से लाभान्वित 15.75 लाख बुजुर्ग

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत राज्य में 15 लाख 75 हजार से अधिक वृद्धजन नियमित रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्हें प्रतिमाह 600 रुपये पेंशन मिलती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस योजना पर कुल 1143 करोड़ 53 लाख रुपये खर्च किए गए।

यह योजना बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ उनके सम्मान और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

CM ने क्यों कहा “सभी हों संकल्पित”?

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वृद्धजन दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे बुजुर्गों की सेवा और सम्मान के लिए संकल्प लें। उनका कहना था कि बुजुर्ग समाज के मार्गदर्शक हैं और उनकी देखभाल करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

बुजुर्गों का योगदान और युवाओं के लिए प्रेरणा

डॉ. यादव ने कहा कि बुजुर्गों का जीवन अनुभव, उनका ज्ञान और संस्कार नई पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देते हैं। युवा उनके अनुभव से सीख लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार उनके कल्याण और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है।

बुजुर्गों का सम्मान, समाज की सशक्त नींव

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का संदेश साफ है—“वृद्धजन केवल परिवार या समाज के सदस्य नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और राष्ट्र की पहचान हैं। उनकी सेवा और सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है।”