जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन से भारत को वैश्विक पहचान मिली है। रामायण आज भी जीवन, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का मार्गदर्शन करती है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को समझने से जीवन के अनेक जटिल प्रश्नों के उत्तर सहज ही मिल जाते हैं। इन्हीं दो महान आदर्शों के माध्यम से भारत की पहचान पूरे विश्व में बनी है। जहां अंधकार है, वहां प्रकाश फैलाना ही सनातन संस्कृति का मूल भाव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी भावना के साथ भगवान श्रीराम ने लाखों वर्ष पहले अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किया। भारतीय सनातन संस्कृति में 33 करोड़ देवी-देवताओं का उल्लेख है, लेकिन भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के कारण ही भारत को वैश्विक पहचान मिली है। इन्हीं ऐतिहासिक आधारों पर भारत को विश्व गुरु कहा जाता रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को जबलपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

रामायण से मिलते हैं पराक्रम, प्रेम और समानता के संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रामायण काल में महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए और संतों के यज्ञ में बाधा डालने वाले असुरों का अंत कराया। भगवान श्रीराम ने अपनी बुद्धि और पराक्रम से राजा जनक के दरबार में स्वयंवर जीता।

उन्होंने निषादराज और शबरी माता के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने मित्रता, प्रेम और समानता का संदेश दिया। रामराज्य का स्मरण जीवन के कठिन से कठिन समय में भी संबल देता है। उन्होंने कहा कि लगभग 550 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, जिसमें महाराज रामभद्राचार्य की तर्कशक्ति का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

जबलपुर: जाबालि ऋषि की पावन भूमि पर अंतर्राष्ट्रीय आयोजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर जाबालि ऋषि की पावन भूमि है और यहां इस तरह का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होना गौरव की बात है। नर्मदा मैया और प्रकृति की अद्भुत लीला यहां देखने को मिलती है, जहां काले पत्थर भी संगमरमर बनकर उज्ज्वल स्वरूप में दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन को स्वामी रामभद्राचार्य जी का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से देश-विदेश से आए सभी प्रतिनिधियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

सनातन संस्कृति के संरक्षण में संतों की भूमिका अहम: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत

केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ऋषि जाबालि की पावन भूमि जबलपुर में वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का आयोजन अद्भुत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश डबल इंजन सरकार के माध्यम से सुशासन और रामराज्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों तक भारतीय संस्कृति को मिटाने के प्रयास हुए, लेकिन सनातन संस्कृति का संरक्षण संतों के कारण ही संभव हो पाया। सम्मेलन में देश-विदेश से आए 120 विद्वानों के व्याख्यान होंगे। उन्होंने बताया कि जबलपुर में श्रीराम भक्तों द्वारा 28 हजार से अधिक सुंदरकांड पाठ किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी ने सरल भाषा में रामायण के माध्यम से भगवान श्रीराम के चरित्र को जन-जन तक पहुंचाया। आज सांस्कृतिक पुनर्जागरण के इस दौर में सनातन मूल्यों की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ रही है, लेकिन कुछ भारत विरोधी ताकतें डिजिटल माध्यमों से भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का प्रयास कर रही हैं। युवाओं को श्रीराम के आदर्श अपनाकर रामायण के ब्रांड एम्बेसडर बनना चाहिए।

राम राष्ट्र के मंगल का प्रतीक: स्वामी रामभद्राचार्य

स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि राम शब्द में ‘रा’ का अर्थ राष्ट्र और ‘म’ का अर्थ मंगल है, अर्थात जो राष्ट्र के मंगल का कार्य करे वही राम है। उन्होंने सुझाव दिया कि रामायण को राष्ट्र ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रामायण में लिखा है कि भय बिना प्रीति नहीं होती। अब समय आ गया है कि हमारा नारा केवल ‘ओम शांति’ नहीं बल्कि ‘ओम क्रांति’ होना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महात्मा गांधी ने अपने भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ को रामचरित मानस से लिया था।

रामायण सम्मेलन की यात्रा और आयोजन की जानकारी

विधायक श्री अजय विश्नोई ने बताया कि रामायण सम्मेलन की यात्रा वर्ष 2004 से प्रारंभ हुई है। यह बहुआयामी आयोजन है, जिसमें 25 सत्र होंगे और देश-विदेश के 60 से अधिक वक्ता अपने विचार साझा करेंगे। इस अवसर पर डॉ. अखिलेश गुमाश्ता की जापानी भाषा की हायकू कृति का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, संस्कृति राज्य मंत्री श्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी, सांसद श्री आशीष दुबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि, विद्वान और रामभक्त उपस्थित रहे।