Kalidas Samaroh 2026: 68वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह का आयोजन 21 से 27 नवंबर तक होगा। CM मोहन यादव ने कवि प्रदीप, शरद जोशी समेत प्रदेश की साहित्यिक विभूतियों को कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश दिए।
उज्जैन का कालिदास समारोह इस बार सिर्फ महाकवि कालिदास की रचनाओं और संस्कृत परंपरा तक सीमित नहीं रहेगा। मध्य प्रदेश की अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को भी इससे जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 68वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह की तैयारियों की समीक्षा करते हुए प्रदेश की चर्चित साहित्यिक विभूतियों की स्मृतियों पर आधारित कार्यक्रम शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
21 से 27 नवंबर तक चलेगा समारोह
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में आयोजित केंद्रीय समिति की बैठक में सात दिवसीय समारोह की तैयारियों और प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी ली। 68वां अखिल भारतीय कालिदास समारोह 21 से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। समारोह केंद्रीय समिति के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं।
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कवि प्रदीप से शरद जोशी तक की विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि समारोह में मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध गीतकारों और साहित्यकारों की स्मृतियों को भी स्थान मिलना चाहिए। इसमें कवि प्रदीप, कृष्ण सरल, शिवमंगल सिंह सुमन और शरद जोशी जैसे नामों से जुड़ी गतिविधियां शामिल करने की बात कही गई है। वरिष्ठ रंगकर्मियों और निर्देशकों को भी अपनी कला प्रस्तुत करने के अवसर देने के निर्देश दिए गए।
युवाओं और क्षेत्रीय भाषाओं पर भी फोकस
समारोह में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन कला प्रतियोगिताएं आयोजित करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने संगीत विद्यालयों और विश्वविद्यालयों को जोड़ने के साथ क्षेत्रीय बोलियों और भाषाओं के प्रतिनिधियों को भी मंच देने की बात कही। एकात्मधाम ओंकारेश्वर और पुलिस बैंड की प्रस्तुतियों को भी समारोह से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
20 नवंबर से शुरू होगा 'पूर्व रंग'
अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि मुख्य समारोह से पहले 20 नवंबर को मंगल कलश यात्रा और नांदी सांस्कृतिक प्रस्तुति होगी। 21 नवंबर को राष्ट्रीय चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी का शुभारंभ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। शास्त्रीय वादन के प्रसिद्ध कलाकार भी इसमें शामिल होंगे।
सात दिनों में होंगे ये प्रमुख कार्यक्रम
कार्यक्रम के अनुसार 22 नवंबर को राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी और पंडित सूर्यनारायण व्यास स्मृति व्याख्यान होगा। 23 नवंबर को महाकवि कालिदास स्मृति व्याख्यान, 24 नवंबर को पद्मश्री वाकणकर स्मृति व्याख्यान और संस्कृत नाटक होंगे। 25 नवंबर को संस्कृत कवि समवाय और हिंदी नाटक, 26 नवंबर को संत समागम होगा। 27 नवंबर को सांस्कृतिक प्रस्तुति और पुरस्कार वितरण के साथ समारोह का समापन होगा।
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