MP food Department Reforms: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक में उपभोक्ता हितों के लिए नवाचारों पर जोर दिया। राशन वितरण, GPS मॉनिटरिंग, जन पोषण मार्ट और ऑनलाइन सिस्टम से सरकार को करोड़ों की बचत और लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है।

मध्यप्रदेश सरकार अब खाद्य और राशन वितरण व्यवस्था को सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि तकनीक आधारित जनसेवा मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक में साफ कहा कि विभाग को लगातार नवाचार करते हुए उपभोक्ताओं के हित में काम करना चाहिए।

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भोपाल में मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा किए जा रहे कई तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और तकनीक के इस्तेमाल से आम लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है और इस दिशा में काम लगातार जारी रहना चाहिए।

राशन की जानकारी अब सीधे मोबाइल पर

राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम के तहत एक नई व्यवस्था शुरू की है, जिसमें पात्र हितग्राहियों को राशन वितरण की जानकारी मोबाइल संदेश के जरिए भेजी जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को समय पर यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके राशन की आपूर्ति कब और कहां हुई। मुख्यमंत्री ने इसे उपभोक्ता कल्याण की दिशा में अहम कदम बताया।

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उचित मूल्य दुकानों को बनाया जा रहा ‘जन पोषण मार्ट’

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उचित मूल्य दुकानों को सिर्फ राशन वितरण केंद्र तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें “जन पोषण मार्ट” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक आवश्यक खाद्य सामग्री और पोषण से जुड़ी सुविधाएं बेहतर तरीके से पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है तो ग्रामीण और गरीब परिवारों को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।

सरकार को हर महीने 42 लाख की बचत

बैठक में मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि परिवहन रूट ऑप्टिमाइजेशन के जरिए सरकार को हर महीने करीब 42 लाख रुपये की बचत हो रही है। योजना के तहत राशन परिवहन करने वाले वाहनों में GPS आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है, जिसे स्टेट लेवल कमांड कंट्रोल सेंटर से ट्रैक किया जा रहा है। इससे निगरानी मजबूत हुई है और अनियमितताओं पर नियंत्रण में मदद मिली है।

अनाज भंडारण में नुकसान कम करने की तैयारी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अनाज भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के कर्मचारियों को भारतीय प्रबंध संस्थान मुंबई में प्रशिक्षण दिलाने की पहल की सराहना की। सरकार का उद्देश्य है कि आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के जरिए भंडारण क्षमता बढ़ाई जाए और अनाज की बर्बादी कम हो।

ऑनलाइन सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता

सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन ने भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया है। इसके अलावा उपार्जन, मिलिंग और परिवहन में उपयोग किए जा रहे वाहनों का सत्यापन ULIP सॉफ्टवेयर के जरिए किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्थाओं के कारण सरकार को ब्याज राशि में भी बड़ी बचत हुई है। खाली बारदाने की खरीद के लिए लागू नई भुगतान प्रणाली से करीब 18 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई है।

गेहूं उपार्जन के लिए नया मॉडल तैयार होगा

मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीद व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिसमें गेहूं की प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग और अन्य कार्यों में लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों के साथ स्व-सहायता समूहों की भी भागीदारी हो। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

ई-केवाईसी और गैस वितरण पर भी फोकस

बैठक में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), शहरी गैस वितरण नेटवर्क और PDS हितग्राहियों के ई-केवाईसी अभियान की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री Govind Singh Rajput, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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