मुख्यमंत्री ने गांधी सागर अभयारण्य में दो चीतों को छोड़ा। कूनो के बाद अब गांधी सागर भी चीतों का नया घर बना, MP 'चीता स्टेट' बनने की ओर अग्रसर।

मध्यप्रदेश एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल कर रहा है। कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए चीतों की सफलता के बाद अब गांधी सागर अभयारण्य को भी चीतों का नया घर बनाया गया है।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छोड़े दो चीते

वन्यप्रेमियों के लिए गौरव का क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गांधी सागर अभयारण्य में खुद दो चीतों को बाड़े से जंगल में छोड़ा। इस ऐतिहासिक क्षण ने मध्यप्रदेश को फिर एक बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वन्य संरक्षण मानचित्र पर ला खड़ा किया है।

क्यों चुना गया गांधी सागर?

मध्यप्रदेश के नीमच और मंदसौर जिलों की सीमा पर स्थित गांधी सागर वन्य क्षेत्र 368 वर्ग किमी में फैला है और इसकी पारिस्थितिकी चीतों के अनुकूल है। यहां की प्राकृतिक घासभूमि, खुले जंगल और शिकार की उपलब्धता इसे चीतों के लिए आदर्श बनाती है।

चीतों के लिए तैयार की गई विशेष निगरानी व्यवस्था

यहां चीतों की सुरक्षा के लिए आधुनिक निगरानी तकनीकों जैसे GPS कॉलर, ड्रोन कैमरे और विशेष टीम की 24x7 निगरानी व्यवस्था की गई है। इससे चीतों की हर हरकत पर नजर रखी जा सकेगी और उनका अनुकूलन प्रक्रिया सफल होगी।

मध्यप्रदेश: भारत का चीता हब बनने की ओर

कूनो की सफलता और गांधी सागर की नई शुरुआत से साफ है कि मध्यप्रदेश अब भारत में 'चीता स्टेट' बनने की ओर अग्रसर है। यह कदम न केवल जैव विविधता को बढ़ाएगा, बल्कि वन पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।