मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने साहिबजादों के बलिदान को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही।

सिख धर्म के दसवें गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने शिरकत की । इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर हमारे देश की उज्जवल परंपरा में स्वाभिमान और संस्कृति को बचाने के लिए विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ अपने पूरे परिवार को कुर्बान किया । उनकी ये जीवन यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणादायी है।

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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि धर्म मार्ग पर सात्विकता के माध्यम से चलने के लिए परमात्मा को याद करते हुए हमारे सभी गुरुओं ने जीवन जीने का मार्ग दिखाया तो साथ ही अगर दुश्मन अपनी नीयत से, अपने छल और चालाकियों से हमारे खिलाफ जाता है तो पंथ बनाकर, हथियार उठाकर बहादुरी से लड़ना और अपने देश की रक्षा करना भी गुरु महाराज ने सिखाया है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पिता को शहादत देने के लिए भी प्रेरित किया तो अपने साहिबजादों को भी धर्म संस्कृति के लिए कुर्बान किया। हर युग, काल में आपकी ये शहादत याद रखी जाएगी।

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नादान लोगों की वजह से पाकिस्तान को मिला ननकाना साहिब

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहिबजादों के बलिदान की गाथा स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी । मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 26 दिसबंर को बाल दिवस मनाने के लिए आभार जताते हुए उनकी प्रशंसा की और कहा कि ननकाना साहेब के लिए कॉरिडोर बनाने का कार्य भी मोदी सरकार ने किया । उन्होंने ये भी कहा कि आजादी के समय हम गुरु नानक देव जी के जन्म स्थान को अपने यहां रख सकते थे लेकिन नादान लोगों ने उसको पाकिस्तान का हिस्सा बनाया।