मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री को हतोत्साहित किया जाएगा और प्राकृतिक पनीर को बढ़ावा मिलेगा।
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में प्राकृतिक दूध से बने पनीर को ही बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि एनालॉग पनीर जैसे उत्पादों की बिक्री को हतोत्साहित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह माना जा रहा है कि राज्य सरकार इस दिशा में कड़े फैसले ले सकती है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।
CM मोहन यादव बोले- प्राकृतिक पनीर ही बनेगा पहचान
12 अगस्त को मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश के कुछ अन्य राज्यों में भी ऐसे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। ऐसे में मध्यप्रदेश भी प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों को प्राथमिकता देने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दूध का पर्याप्त उत्पादन होता है और राज्य की पहचान भी प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों के आधार पर मजबूत की जानी चाहिए। इसलिए सरकार का फोकस प्राकृतिक दूध से तैयार पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों को बढ़ावा देने पर रहेगा।
दूध उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार लगातार दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि किसानों और दुग्ध उत्पादकों को अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जब राज्य में प्राकृतिक दूध और उससे बने उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, तब एनालॉग पनीर जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने का कोई औचित्य नहीं है।
क्या है सरकार का संदेश?
मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि मध्यप्रदेश सरकार प्राकृतिक और पारंपरिक दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति पर आगे बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल डेयरी उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने दोहराया कि एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को राज्य सरकार किसी भी स्तर पर प्रोत्साहन नहीं देगी और प्राकृतिक पनीर को ही प्राथमिकता दी जाएगी।


