मध्यप्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण पर बड़ा फैसला लेते हुए किसानों को गाइडलाइन वैल्यू का 4 गुना मुआवजा देने का ऐलान किया है। इससे किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और विकास परियोजनाओं को भी तेजी मिलेगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने 22 अप्रैल को किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया। अब राज्य में किसी भी किसान की जमीन अधिग्रहित होने पर उसे गाइडलाइन वैल्यू का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। यह फैसला किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य दिलाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पहले क्या थी व्यवस्था और क्यों नहीं मिल रहा था सही दाम?
पहले मध्यप्रदेश में वर्ष 2014 से भूमि अधिग्रहण के लिए फैक्टर-1 लागू था। इसका मतलब था कि किसानों को गाइडलाइन दर का दोगुना मुआवजा मिलता था। लेकिन व्यवहार में गाइडलाइन दर बाजार मूल्य से काफी कम होती थी, जिससे किसानों को उनकी जमीन का सही मूल्य नहीं मिल पाता था। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव किया और अब मुआवजा दोगुना से बढ़ाकर चार गुना कर दिया गया है।
कौन-कौन सी परियोजनाओं पर होगा असर?
इस नए फैसले का सीधा असर राज्य की कई बड़ी विकास परियोजनाओं पर पड़ेगा, जैसे:
- सिंचाई परियोजनाएं
- सड़क और पुल निर्माण
- रेलवे लाइन
- बांध और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
इसके अलावा, जिन मामलों में अभी तक अंतिम अवॉर्ड जारी नहीं हुआ है, वहां भी इस नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
किस कानून के तहत किया गया बदलाव?
यह संशोधन 'मध्य प्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013' के तहत किया गया है। इस अधिनियम की धारा 26 में भूमि के मूल्य निर्धारण के नियम तय किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उचित मुआवजा देना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।
संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?
राज्य सरकार का मानना है कि किसानों को उनकी जमीन का सही मूल्य मिलना बेहद जरूरी है। हर साल प्रदेश में लगभग 70,000 से 75,000 करोड़ रुपये का निवेश सड़कों, एक्सप्रेस-वे, रेलवे और सिंचाई परियोजनाओं में किया जाता है। लेकिन भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के विवाद के कारण कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती थीं। इसलिए इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए यह संशोधन किया गया।
समिति बनाकर लिया गया निर्णय
इस फैसले से पहले एक मंत्रिमंडलीय समिति बनाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने की।
समिति में शामिल थे:
- चैतन्य कश्यप (लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री)
- तुलसीराम सिलावट (जल संसाधन मंत्री)
इस समिति ने विभिन्न संगठनों जैसे फिक्की, क्रेडाई, सीआईआई और किसान प्रतिनिधियों से चर्चा की। सभी की सहमति से फैक्टर-1 को बढ़ाकर 2 करने की सिफारिश की गई, जिससे मुआवजा 4 गुना हो गया।
अब कितना मिलेगा मुआवजा?
नई व्यवस्था के तहत:
- लोक निर्माण विभाग पहले 10,000 करोड़ रुपये मुआवजा देता था, अब यह बढ़कर लगभग 20,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।
- जल संसाधन विभाग द्वारा 4500 हेक्टेयर भूमि के लिए पहले 1,000 करोड़ रुपये तय थे, अब यह राशि भी दोगुनी हो जाएगी।
यह पूरी राशि सीधे किसानों के खातों में जमा की जाएगी।
विकास और किसान हित के बीच संतुलन
मुख्यमंत्री का कहना है कि यह फैसला सिर्फ मुआवजा बढ़ाने का नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान से जुड़ा है। सरकार का उद्देश्य है कि विकास परियोजनाएं भी तेजी से पूरी हों और किसानों को भी उनका अधिकार मिले।
किसान कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
सरकार का मानना है कि विकास तभी संभव है जब किसान उसमें भागीदार बनें। कई परियोजनाएं सिर्फ भूमि विवाद के कारण वर्षों से अटकी हुई थीं। अब इस फैसले से इन परियोजनाओं को गति मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- नियमों को सरल बनाया गया है
- मुआवजे से जुड़े विवाद कम होंगे
- किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा


