मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर “सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान” शुरू किया गया है। 1 करोड़ 1 लाख रुपये के इस सम्मान के लिए देश-विदेश के व्यक्ति और संस्थाएं 20 मई 2026 तक आवेदन कर सकती हैं।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली स्मृति को विश्व स्तर पर स्थापित करने के उद्देश्य से 'सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान' की शुरुआत की गई है। यह सम्मान सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, न्यायप्रियता, सुशासन, दानशीलता, प्रजावत्सलता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा संस्कृति विभाग के सहयोग से इस सम्मान की स्थापना की गई है। अंतर्राष्ट्रीय सम्मान की राशि 1 करोड़ 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और पाँच-पाँच लाख रुपये के तीन शिखर सम्मान भी शुरू किए गए हैं। यह पहल भारतीय संस्कृति और परंपरा को विश्व मंच पर नई पहचान देने का प्रयास है।

20 मई 2026 तक कर सकते हैं आवेदन और नामांकन

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि सम्मान के लिए आवेदन और नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं 20 मई 2026 तक आवेदन कर सकती हैं।

सम्मान से जुड़ी पूरी जानकारी शोधपीठ की आधिकारिक वेबसाइट awards.mvspujjain.com पर उपलब्ध है। वेबसाइट पर पात्रता, चयन प्रक्रिया, दिशा-निर्देश और विभिन्न पुरस्कार श्रेणियों की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय सम्मान, राष्ट्रीय सम्मान और शिखर सम्मान के लिए 'स्पीड रीड' सारांश भी उपलब्ध कराया गया है, जिसमें पुरस्कारों की अर्हताओं का उल्लेख है।

सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान की खास बातें

1 करोड़ 1 लाख रुपये का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान उन विशिष्ट व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाएगा, जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों जैसे सुशासन, न्यायप्रियता, प्रज्ञा, दानवीरता, संस्कृति प्रेम, विज्ञान बोध और लोक कल्याण को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया हो। इस सम्मान की राशि 1 करोड़ 1 लाख रुपये तय की गई है।

किन क्षेत्रों में किया जाएगा सम्मानित

इस सम्मान के लिए न्याय, दानवीरता, सुशासन, खगोल और ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, राजनय, आध्यात्म, विश्व मानव कल्याण, समाज अभ्युदय, अंतर्राष्ट्रीय भाईचारा, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवाचार और भारतीय दर्शन एवं वेदांत के प्रचार-प्रसार जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति और संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं।

राष्ट्रीय सम्मान में मिलेगा 21 लाख रुपये का पुरस्कार

राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को 21 लाख रुपये की राशि के राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान न्याय, दानवीरता, वीरता, सुशासन, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, प्राच्य वाङ्मय, राजनय, आध्यात्मिक क्षेत्र और रचनात्मक जनकल्याणकारी कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को प्रदान किया जाएगा।

तीन शिखर सम्मान भी किए गए स्थापित

इन पुरस्कारों के अलावा पाँच-पाँच लाख रुपये के तीन शिखर सम्मान भी स्थापित किए गए हैं। ये सम्मान न्याय विधि, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, प्राच्य वाङ्मय, राजनय, आध्यात्मिक क्षेत्र और जनकल्याणकारी कार्यों में विशेष योगदान देने वाले भारत के सक्रिय व्यक्तियों और संस्थाओं को दिए जाएंगे।

सम्मान के लिए पात्रता और आवेदन प्रक्रिया

कौन कर सकता है आवेदन

यह सम्मान ऐसे व्यक्ति और संस्थाओं को दिया जाएगा, जिन्होंने युग निर्माण, विश्व मानव कल्याण, समाज अभ्युदय, अंतर्राष्ट्रीय भाईचारा, सर्वधर्म समन्वय, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवाचार, भारतीय दर्शन, धर्म, न्याय, परंपरा और वेदांत के प्रचार-प्रसार में उत्कृष्ट योगदान दिया हो। सम्मान के लिए देश-विदेश के व्यक्तियों, संस्थाओं, समाजशास्त्रियों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, समीक्षकों, पत्रकारों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से नामांकन और अनुशंसाएं आमंत्रित की गई हैं।

चयन प्रक्रिया में होगा उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल

सम्मान चयन के लिए हर वर्ष एक उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल बनाया जाएगा। इस मंडल में मुख्यमंत्री अध्यक्ष होंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति मंत्री और मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव स्थायी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। इसके अलावा समाजसेवी, बुद्धिजीवी, समाजशास्त्री, लेखक, पत्रकार, उद्योगपति, न्यायविद, पुरातत्वविद, चिकित्सक और अन्य विशेषज्ञ भी निर्णायक मंडल का हिस्सा होंगे।

चयन के लिए क्या होंगे आधार

चयन प्रक्रिया में संबंधित क्षेत्र में उच्च स्तर की सृजनात्मकता, विशेष उपलब्धि, निरंतर साधना और योगदान को आधार बनाया जाएगा। चयन के समय संबंधित व्यक्ति या संस्था का सक्रिय और लगातार कार्यरत होना जरूरी होगा। निर्णायक मंडल के सामने प्रस्तुत नामों के अलावा मंडल अपने विवेक से अन्य नामों पर भी विचार कर सकेगा।

एक बार सम्मान प्राप्त कर चुके व्यक्ति या संस्था को दोबारा यह सम्मान नहीं दिया जाएगा। निर्णायक मंडल द्वारा सर्वसम्मति से तय नाम राज्य सरकार को भेजे जाएंगे और शासन की स्वीकृति के बाद सम्मान की औपचारिक घोषणा की जाएगी।