MP में 88,634 करोड़ के रोड मास्टर प्लान पर काम होगा। भोपाल-विदिशा 4-लेन, 7 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और मेट्रोपोलिटन कनेक्टिविटी पर बड़ा फोकस है।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब मेट्रोपोलिटन विकास, आधुनिक अधोसंरचना और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। भोपाल और उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों की अधिसूचना को उन्होंने सुनियोजित शहरी और क्षेत्रीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

राज्य सरकार इन मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों से जुड़े शहरों, कस्बों, औद्योगिक क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन केंद्रों और आर्थिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर काम कर रही है। इसके लिए मौजूदा सड़कों के उन्नयन के साथ एक्सप्रेस-वे, ग्रीनफील्ड सड़कें, रिंग रोड, बायपास और हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक मेट्रोपोलिटन विकास का मतलब सिर्फ बड़े शहरों की सीमाओं का विस्तार करना नहीं है। इसके दायरे में आसपास के छोटे शहर, नगरीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्र भी आएंगे। बेहतर सड़क, सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ इन इलाकों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।

Bhopal-Vidisha 4 Lane Road: 1,757 करोड़ की परियोजना कैबिनेट में

भोपाल–विदिशा 4-लेन सड़क परियोजना का प्रस्ताव 11 अगस्त को मंत्रि-परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर प्रस्तावित इस परियोजना की कुल लागत 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये है। इस परियोजना के तहत मौजूदा 44.83 किलोमीटर लंबे 2-लेन मार्ग को पेव्ड शोल्डर के साथ 4-लेन में अपग्रेड किया जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। यह सड़क भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर होते हुए एनएच-146 के सांची–सलामतपुर जंक्शन तक जाएगी। यह भोपाल, रायसेन और विदिशा को जोड़ने वाला अहम क्षेत्रीय मार्ग है।

अभी इस सड़क पर यातायात करीब 10,975 पैसेंजर कार यूनिट है, जबकि 4-लेन सड़क के लिए निर्धारित मानक 10 हजार पैसेंजर कार यूनिट है। यानी मौजूदा यातायात मानक से ऊपर पहुंच चुका है। महानगरीय क्षेत्र के विस्तार और आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले ट्रैफिक को देखते हुए सड़क का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है।

Bhopal Vidisha Bypass: तीन बायपास से घटेगा ट्रैफिक का दबाव

भोपाल–विदिशा परियोजना में कुल 8.25 किलोमीटर के तीन बायपास भी प्रस्तावित हैं। इनमें 1.80 किलोमीटर का सूखी सेवनिया बायपास, 1.35 किलोमीटर का बेरखेड़ी बायपास और 5.10 किलोमीटर का सलामतपुर बायपास शामिल है। इन बायपास से आबादी वाले इलाकों में भारी यातायात का दबाव कम होगा। सड़क दुर्घटनाओं की आशंका घटेगी और स्थानीय लोगों का आवागमन भी सुरक्षित होगा। यह मार्ग भोपाल–कानपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए महत्वपूर्ण फीडर कॉरिडोर के रूप में भी काम करेगा।

Sanchi Tourism Connectivity: सांची, उदयगिरि और विदिशा तक आसान होगा सफर

भोपाल–विदिशा मार्ग केवल यातायात के लिहाज से ही अहम नहीं है। धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। इस मार्ग के आसपास सांची स्तूप, संग्रहालय, अशोक स्तंभ, उदयगिरि की गुफाएं सहित कई पुरातात्विक और सांस्कृतिक स्थल मौजूद हैं। मार्ग करीब 24.550 किलोमीटर पर कर्क रेखा से भी गुजरता है, जिससे इसका भौगोलिक महत्व भी है।

बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से भोपाल से विदिशा और सांची की यात्रा आसान और कम समय वाली होगी। इसका सीधा फायदा पर्यटन को मिल सकता है। होटल, परिवहन, गाइड सेवाओं, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। एनएचएआई द्वारा रायसेन, सांची और विदिशा को बायपास करते हुए तैयार किए जा रहे नए 4-लेन मार्ग से जुड़ने के बाद यह परियोजना भोपाल से सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना और उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश के अन्य हिस्सों की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी।

Ujjain-Indore Road Projects: 6-लेन और ग्रीनफील्ड सड़कों पर जोर

उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में तेज और सुरक्षित आवागमन के लिए कई बड़ी सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें इंदौर–उज्जैन 6-लेन मार्ग, इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड 4-लेन मार्ग, उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड 4-लेन मार्ग, उज्जैन–मक्सी 4-लेन चौड़ीकरण, उज्जैन सिंहस्थ बायपास और हरिफाटक ब्रिज का चौड़ीकरण प्रमुख हैं।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इंदौर आउटर रिंग रोड पर भी काम कर रहा है। वहीं उज्जैन–नागदा 4-लेन सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। उज्जैन–झालावाड़ 4-लेन मार्ग की स्वीकृति फिलहाल भारत सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। उज्जैन–जावरा मार्ग के जरिए उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की दिशा में भी काम चल रहा है। इससे उज्जैन को देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक कॉरिडोर तक सीधा संपर्क मिल सकेगा।

Indore-Ujjain Connectivity: रिंग रोड से शहरों के अंदर घटेगा ट्रैफिक

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर की ईस्टर्न और वेस्टर्न रिंग रोड के साथ उज्जैन क्षेत्र की बायपास परियोजनाएं महानगरीय क्षेत्र में वाहनों के दबाव को कम करने में मदद करेंगी। भारी और लंबी दूरी के वाहन शहरों के भीतर आए बिना अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे यात्रा का समय और ईंधन दोनों बचेंगे। साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और शहरों का यातायात ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगा।

Bhopal Metropolitan Region: ईस्टर्न-वेस्टर्न बायपास से बनेगा नया नेटवर्क

भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के विकास के लिए राजधानी और आसपास के शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों, शिक्षण संस्थानों और आर्थिक केंद्रों को क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इस योजना में भोपाल वेस्टर्न बायपास, भोपाल ईस्टर्न बायपास, भोपाल–इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और भोपाल–विदिशा 4-लेन मार्ग प्रमुख हैं।

भोपाल वेस्टर्न बायपास को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि ईस्टर्न बायपास की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भोपाल में प्रवेश करने वाले और शहर से होकर गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ते मिलेंगे। इससे शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और भोपाल के आने वाले दशकों के विस्तार के लिए बेहतर आधार तैयार होगा।

प्रस्तावित भोपाल–इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे भोपाल और इंदौर जैसे दो प्रमुख मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के बीच तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी विकसित करेगा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन के बीच बेहतर संपर्क से निवेशकों, कारोबारियों, छात्रों, पर्यटकों और आम नागरिकों को फायदा होगा। साथ ही नए औद्योगिक, व्यावसायिक और सर्विस सेक्टर क्लस्टर विकसित होने की संभावना बढ़ेगी।

MP Road Development: ढाई साल में 29,693 KM सड़कों का निर्माण-उन्नयन

मुख्यमंत्री ने बताया कि सिर्फ मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने का काम चल रहा है। लोक निर्माण विभाग ने पिछले ढाई वर्षों में 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और उन्नयन पूरा किया है। इससे दूरदराज और ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिली है।

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम 18,166 करोड़ रुपये की लागत वाली 444 किलोमीटर लंबी सात प्रमुख परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इनमें इंदौर–उज्जैन 6-लेन, इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड 4-लेन, उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड 4-लेन और नर्मदापुरम–टिमरनी मार्ग प्रमुख हैं।

इसके अलावा 26,890 करोड़ रुपये की लागत वाली 626 किलोमीटर लंबी नौ परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में प्रक्रियाधीन हैं। इनमें भोपाल–विदिशा मार्ग, कटनी–दमोह मार्ग, पूर्वी भोपाल बायपास, सिवनी–बालाघाट मार्ग, देवास–चापड़ा मार्ग, मेलघाट चौराहा–मालथौन मार्ग, तिलवारी–हरदी–जनकपुर मार्ग और मंदसौर–सीतामऊ मार्ग शामिल हैं।

आने वाले समय की परियोजनाओं के लिए 1,734 किलोमीटर लंबी 41 परियोजनाओं की डीपीआर भी तैयार की जा रही है।

MP Greenfield Expressway: 794 KM के तीन एक्सप्रेस-वे पहले चरण में

मध्यप्रदेश को एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी के मामले में आगे ले जाने के लिए बीओटी मॉडल पर एकीकृत ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे नेटवर्क विकसित करने की योजना है। पहले चरण में कुल 794 किलोमीटर लंबे तीन एक्सप्रेस-वे की डीपीआर तैयार की जा रही है। इनमें सागर–सतना एक्सप्रेस-वे, भोपाल–मंदसौर एक्सप्रेस-वे और जबलपुर–आशापुर एक्सप्रेस-वे शामिल हैं। इनकी अनुमानित लागत 38,456 करोड़ रुपये है।

इन एक्सप्रेस-वे के बनने के बाद सागर से सतना की यात्रा का समय 6-7 घंटे से घटकर करीब 3 से साढ़े 3 घंटे रह सकता है। वहीं भोपाल–मंदसौर और जबलपुर–आशापुर मार्ग पर अभी लगने वाले करीब 8 से 9 घंटे के सफर को घटाकर लगभग 5 से 6 घंटे करने का अनुमान है।

Seven Expressways MP: दूसरे चरण में चार नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर

दूसरे चरण में बीओटी मॉडल पर करीब 926 किलोमीटर लंबे चार नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित हैं। इनमें शामिल हैं:

  • सागर–जबलपुर एक्सप्रेस-वे: करीब 135 किलोमीटर
  • कटनी–सिंगरौली एक्सप्रेस-वे: करीब 232 किलोमीटर
  • भोपाल–जबलपुर एक्सप्रेस-वे: करीब 239 किलोमीटर
  • भोपाल–ग्वालियर एक्सप्रेस-वे: करीब 320 किलोमीटर

इन परियोजनाओं से अलग-अलग मार्गों पर यात्रा समय में करीब डेढ़ घंटे से लेकर पौने तीन घंटे तक की बचत होने का अनुमान है। सभी सात एक्सप्रेस-वे विकसित होने के बाद प्रदेश के प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और आर्थिक केंद्रों के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध संपर्क तैयार होगा। सरकार इसे मध्यप्रदेश को “एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी स्टेट” के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम मान रही है।

MP Road Master Plan: 88,634 करोड़ का भविष्य का रोड नेटवर्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम गतिशक्ति पोर्टल के जरिए मध्यप्रदेश में सड़क नेटवर्क की लंबी अवधि की योजना को डेटा आधारित बनाया गया है। जीआईएस आधारित व्यवस्था से मौजूदा और प्रस्तावित सड़कों, कनेक्टिविटी गैप और संभावित विकास क्षेत्रों का एक साथ विश्लेषण किया जा रहा है। इसी आधार पर सड़क परियोजनाओं की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं।

2026-27 से 2030-31 के लिए तैयार रोड नेटवर्क मास्टर प्लान में 1,226 मार्गों की कुल 29,682 किलोमीटर लंबाई के विकास और उन्नयन का लक्ष्य रखा गया है। इन कार्यों की अनुमानित लागत 88,634 करोड़ रुपये है। मास्टर प्लान का आधार “जहां आवश्यकता, वहीं प्राथमिकता” रखा गया है। इसके तहत नए मार्गों की जरूरत, मौजूदा सड़कों के उन्नयन, महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी गैप और आर्थिक-सामाजिक गतिविधियों से जुड़े मार्गों की पहचान वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी।

MP Infrastructure: सड़कें सिर्फ सफर नहीं, विकास का नया रास्ता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश में आधुनिक, सुरक्षित, सुनियोजित और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अधोसंरचना तैयार की जा रही है। सरकार के मुताबिक सड़क परियोजनाओं का मकसद सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना आसान बनाना नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी निवेश, उद्योग, कृषि, पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों का आधार भी बनेगी।

उज्जैन–इंदौर और भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के साथ पूरे प्रदेश में तैयार हो रहा सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क आने वाले समय में मध्यप्रदेश को निवेश, पर्यटन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।