क्या सच में 77 साल बाद भी आज़ादी अधूरी है? नीमच के कलेक्टर ऑफिस में घुटनों के बल घसीटती 32 महिलाएं, न सड़क मिली, न पानी! जनसुनवाई में गूंजा दर्द, प्रशासन हरकत में आया, पर क्या वाकई अब कुछ बदलेगा?

Neemuch Collector Jan Sunwai: नीमच ज़िले के सुठोली गांव की 32 महिलाओं ने कलेक्टर कार्यालय में अनोखे और मार्मिक तरीके से विरोध दर्ज कराया। ये सभी महिलाएं मंगलवार को जनसुनवाई के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचीं, लेकिन उनकी एंट्री ने पूरे परिसर को चौंका दिया। महिलाएं घुटनों के बल रेंगती हुई मुख्य गेट से कलेक्टर कक्ष तक पहुंचीं, जिससे सभी अधिकारी और आमजन सन्न रह गए।

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नीमच की महिलाओं की शिकायत: “आज़ादी मिली, सुविधाएं नहीं” 

महिलाओं ने अपनी शिकायत में बताया कि आजादी के 77 साल बाद भी उनके गांव में न तो पक्की सड़क है, न ही शुद्ध पानी की व्यवस्था। गांव की मुख्य सड़क अब तक कच्ची है, और बारिश में वह नाले का रूप ले लेती है। तीन-चार फीट तक पानी भर जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा हो गया है। गांव में नल या जल जीवन मिशन की सुविधा नहीं है, और गर्मियों में महिलाओं को मीलों दूर से पानी लाना पड़ता है। कुएं और ट्यूबवेल ही जल का एकमात्र सहारा हैं।

नीमच कलेक्टर का त्वरित एक्शन 

महिलाओं की इस अनोखी पहल ने कलेक्टर हिमांशु चंद्रा को भी भावुक कर दिया। उन्होंने तुरंत जिला पंचायत अधिकारियों को सड़क का एस्टीमेट तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही जल जीवन मिशन के अधिकारियों को भी गांव की पेयजल समस्या का समाधान करने के लिए तलब किया गया।

क्या नीमच जिला प्रशासन अब नींद से जागेगा? 

महिलाओं का कहना है कि वे वर्षों से शिकायत कर रही हैं, लेकिन कभी सुनवाई नहीं हुई। यही वजह रही कि उन्होंने इस बार घुटनों पर रेंगकर विरोध जताने का फैसला लिया। सवाल उठता है कि अगर इतनी पीड़ा के बाद भी गांव तक विकास नहीं पहुंचेगा, तो आखिर लोकतंत्र की जनसुनवाई का अर्थ क्या रह जाएगा? महिला ने बताया कि आज़ादी के बाद से अब तक उनके गांव ने किसी भी मूलभूत सुविधा का स्वाद नहीं चखा है।