मध्य प्रदेश के रीवा में सनसनीखेज खुलासा! 74 वर्षीय बुजुर्ग ने जज को 500 करोड़ की फिरौती का पत्र भेजकर दुश्मन को फंसाने की साजिश रची, लेकिन डाकघर CCTV ने राज़ खोल दिया और पुलिस ने बुजुर्ग को गिरफ्तार कर लिया। जानें पूरी कहानी…

Rewa Judge Extortion Case: रीवा जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया जब त्यौंथर कोर्ट की महिला जज मोहिनी भदौरिया को 500 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने वाला धमकी भरा पत्र मिला। शुरू में लगा कि यह काम किसी बड़े गिरोह का है, लेकिन पुलिस जांच ने सबको हैरान कर दिया। पता चला कि यह पत्र किसी डकैत ने नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी 74 वर्षीय बुजुर्ग देवराज सिंह ने भेजा था। उसका मकसद पैसे लेना नहीं बल्कि अपने दुश्मन को झूठे मामले में फंसाना था। लेकिन चाल इतनी भारी पड़ी कि खुद सलाखों के पीछे पहुंच गया। आखिर क्यों बुजुर्ग ने यह खतरनाक कदम उठाया? आइए जानते हैं पूरी कहानी।

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बुजुर्ग ने क्यों भेजा जज को 500 करोड़ की फिरौती का पत्र?

देवराज सिंह की अपने गांव के ही संदीप सिंह से पुरानी दुश्मनी थी। कुछ हफ्ते पहले दोनों के बीच विवाद हुआ था और संदीप पर हमला करने का आरोप भी लगा। पुलिस में शिकायत दर्ज तो हुई, लेकिन देवराज को लगा कि कार्रवाई सही ढंग से नहीं हुई। इसी गुस्से में उसने साजिश रच डाली। उसने सोचा कि अगर जज को धमकी भरा पत्र भेजकर उसमें संदीप का नाम डाला जाए तो पुलिस सीधे उसी को गिरफ्तार कर लेगी। इसलिए उसने 500 करोड़ रुपये की फिरौती का नोट लिखकर भेज दिया।

कैसे हुआ राज़ का खुलासा?

शुरुआत में पुलिस को शक हुआ कि यह किसी गिरोह का काम हो सकता है। लेकिन जब जांच गहराई तक गई तो प्रयागराज डाकघर का CCTV फुटेज सामने आया। इसमें साफ दिख रहा था कि खुद देवराज सिंह ही पंजीकृत डाक से यह पत्र भेज रहा है। फोरेंसिक जांच में भी यही साबित हुआ। सबूतों और पूछताछ के बाद आखिरकार देवराज ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

संदीप सिंह को फंसाने की असली वजह क्या थी?

देवराज सिंह का मानना था कि संदीप उसके खिलाफ लगातार साजिश कर रहा है। दोनों के बीच कई विवाद पहले भी हो चुके थे। इस बार देवराज ने सोचा कि अगर जज को धमकी के जरिए बड़ा मामला बनाया जाए तो संदीप सीधे सलाखों के पीछे पहुंच जाएगा। लेकिन उसकी यह चाल उलटी पड़ गई।

पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

रीवा एसपी विवेक सिंह ने तुरंत विशेष टीम गठित की। पूरी जांच में यह सामने आया कि पत्र किसी गिरोह का काम नहीं बल्कि एक निजी दुश्मनी का नतीजा था। पुलिस ने देवराज को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और सारे सबूत जब्त कर लिए।