महाराष्ट्र चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान जारी है। भाजपा फडणवीस को सीएम बनाने पर अड़ी है, जबकि शिवसेना शिंदे को पद पर बने रहने देना चाहती है। क्या शिंदे की चाल चलेगी या भाजपा की?

नई दिल्ली। 23 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के गठबंधन को भारी जीत मिली। रिजल्ट आए तीन दिन हो गए, लेकिन अभी तक यह फैसला नहीं हो पाया है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सूत्रों से खबर मिली है कि भाजपा देवेन्द्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को सीएम बनाने पर अड़ी हुई है। वहीं, शिव सेना नेता एकनाथ शिंदे द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। संख्या बल भाजपा के पक्ष में है। इसके चलते उम्मीद है कि शिंदे की कोई चाल काम नहीं आएगी।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा ने अपने फैसले के बारे में एनसीपी (अजित पवार गुट) को बता दिया है। फडणवीस 2014 से 2019 तक राज्य के मुख्यमंत्री थे। एनसीपी को उनको सीएम बनाए जाने पर दिक्कत नहीं है। संकेत हैं कि फैसला जल्द ही शिवसेना को बता दिया जाएगा। हालांकि शिवसेना ने मौजूदा सीएम एकनाथ शिंदे को पद पर बनाए रखने के लिए दबाव डाला है।

एकनाथ शिंदे ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा

26 नवंबर को महाराष्ट्र सरकार का 5 साल का कार्यकाल पूरा हो गया। इसके साथ ही शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही पूरा मंत्रिमंडल भंग हो गया है।

भाजपा को मिली है 132 सीटों पर जीत

महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं। बहुमत के लिए 145 विधायकों की जरूरत है। चुनाव में भाजपा को 132 सीटों पर जीत मिली है। अजित पवार की एनसीपी को 41 सीटें मिली हैं। शिव सेना ने 57 सीटें जीती हैं। अगर भाजपा और एनसीपी साथ रहें तब भी संख्या बल बहुमत के पार चला जाएगा। यही वजह है कि सीएम पद को लेकर शिवसेना के दबाव के बहुत काम आने की उम्मीद नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि भाजपा शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) को उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश करेगी। किस पार्टी को कौन सा मंत्रालय मिलेगा इसपर भी विचार किया जा रहा है। शिवसेना और एनसीपी ने क्रमश: शिंदे और पवार को अपने विधायक दल का नेता चुन लिया है। भाजपा ने मंगलवार सुबह तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

यह भी पढ़ें- महाराष्ट्र में मिली करारी हार का असर, जानें राज्यसभा में कितनी घटेगी MVA की ताकत