राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा सीधा सवाल — "क्यों छप रही हैं हिंदी की किताबें जब आदेश नहीं आया?" पहली कक्षा से तीन भाषाएं पढ़ाने की योजना पर सस्पेंस बरकरार, मनसे ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

Raj Thackeray Marathi English demand: महाराष्ट्र की शिक्षा नीति को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य सरकार से मांग की है कि स्कूलों में पहली कक्षा से केवल मराठी और अंग्रेजी ही पढ़ाई जाएं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। राज ठाकरे ने यह मांग स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे को पत्र लिखकर की है। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों से इस मुद्दे पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और अब सरकार को इस पर स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करना चाहिए।

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"किताबें छप गईं, क्या फैसला भी तय हो गया?"

ठाकरे ने सवाल उठाया कि जब हिंदी की पाठ्यपुस्तकों की छपाई शुरू हो गई है, तो क्या इसका मतलब है कि सरकार हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का मन बना चुकी है? या फिर सरकार फैसले से पीछे हटने की तैयारी में है? उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि हिंदी को अनिवार्य बनाया गया तो मनसे आंदोलन शुरू करेगी।

"हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं, क्यों थोप रहे हैं?"

राज ठाकरे ने कहा कि हिंदी कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है, यह देश के कई राज्यों में बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार हिंदी को अनिवार्य करने का दबाव क्यों बना रही है, जबकि कई अन्य राज्यों ने हिंदी को अस्वीकार कर दिया है।

"पहली कक्षा से तीन भाषाएं क्यों?" मनसे प्रमुख ने उठाए प्रश्न

ठाकरे ने यह भी पूछा कि बच्चों को पहली कक्षा से ही तीन भाषाएं क्यों सिखाई जाएं? यह बच्चों पर बोझ डालने जैसा है और इससे उनकी सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। मनसे प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर हिंदी को थोपने का प्रयास किया गया तो मनसे आंदोलन करेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

राज ठाकरे के सवाल "अब तक आदेश क्यों नहीं?"

राज ठाकरे ने कहा कि शिक्षा मंत्री भुसे पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि महाराष्ट्र राज्य शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में सिर्फ दो भाषाएं पढ़ाई जाएंगी, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

क्या है फडणवीस सरकार का रुख?

शिक्षा मंत्री भुसे ने पूर्व में कहा था कि अंतिम निर्णय हितधारकों से बातचीत के बाद लिया जाएगा। परंतु, अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

महायुति सरकार पर दबाव बढ़ा

मनसे के इस पत्र के बाद सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। खासकर तब जब राज्य पहले ही छात्रों और अभिभावकों के विरोध के कारण हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने के कदम से एक बार पीछे हट चुकी है।

ठाकरे की मांग: लिखित आदेश दो, तभी माने जनता

राज ठाकरे ने सवाल किया, “यदि सरकार ने हिंदी को अनिवार्य नहीं करने का निर्णय ले लिया है, तो अब तक उस पर लिखित आदेश क्यों नहीं जारी किया गया?” ठाकरे के अनुसार, सिर्फ मौखिक बयान पर्याप्त नहीं है।