पंजाब के संगरूर में एक सोशल मीडिया प्रभावित के घर बने हेयर ऑयल से 70 से अधिक लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती। हाईकोर्ट ने भ्रामक दावों पर उसकी जमानत ठुकराई, जांच जारी, रहस्य अब भी कायम है। क्या यह तेल वाकई खतरनाक था?

Sangrur Hair Oil Case: पंजाब के संगरूर जिले के काली माता मंदिर में 16 मार्च को हुई एक चौंकाने वाली घटना ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। अमनदीप सिंह नाम के एक सोशल मीडिया प्रभावित ने अपने घर में बनाए गए हेयर ऑयल का उपयोग एक शिविर में किया। उनका दावा था कि यह तेल गंजेपन को दूर करने में मददगार है। लेकिन इसके बाद 70 से अधिक लोगों को गंभीर प्रतिक्रिया के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

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अस्पताल में भर्ती, गंभीर संपर्क जिल्द की सूजन का निदान

तेल लगाने के कुछ ही घंटों बाद, प्रभावित लोगों को आंखों में जलन और चेहरे पर सूजन होने लगी। उन्हें तुरंत संगरूर के सिविल अस्पताल में ले जाया गया, जहां वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने इसे गंभीर संपर्क जिल्द की सूजन बताया। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अगर यह प्रतिक्रिया कॉर्निया तक पहुंचती है तो कुछ मरीजों की दृष्टि प्रभावित हो सकती है।

हाईकोर्ट ने भ्रामक दावों को ठुकराई जमानत

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अमनदीप सिंह को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने पाया कि उनके द्वारा किए गए दावे न तो प्रमाणित थे और न ही किसी नैदानिक परीक्षण द्वारा समर्थित थे। न्यायालय ने कहा कि यह एक भ्रामक विज्ञापन है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।

सोशल मीडिया का दबाव और समाज में बढ़ती असुरक्षा

न्यायाधीश हरप्रीत सिंह बरार ने अपने आदेश में कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया और मार्केटिंग के कारण लोग अस्थिर सामाजिक मानकों का शिकार हो रहे हैं। इस दबाव में लोग जोखिम भरी प्रक्रियाओं को भी अपनाने को मजबूर होते हैं, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।

नकली डॉक्टरों और भ्रामक प्रचारों पर कड़ी चेतावनी

अदालत ने नकली डॉक्टरों और सोशल मीडिया प्रभावितों की भूमिका की निंदा की, जो लाभ के लिए आम लोगों की असुरक्षा का शोषण कर रहे हैं। जस्टिस बरार ने कहा, "वैज्ञानिक आधार के बिना किए गए बड़े और भ्रामक दावों वाली विज्ञापनों की सख्त निंदा होनी चाहिए।" साथ ही राज्य पर ज़ोर दिया कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य और बाजार में विश्वास बनाए रखे।

अमनदीप सिंह का दावा और पेटेंट आवेदन

अमनदीप सिंह ने बताया कि तेल लगाने की प्रतिक्रिया गलत तरीके से तेल लगाने के कारण हुई। उन्होंने तेल के लिए पेटेंट आवेदन भी किया है। उनके वकील ने कहा कि उनका मकसद केवल लोगों को बाल झड़ने से बचाने में मदद करना था।

मामले में दर्ज अपराध, जांच जारी

इस मामले में भारतीय दंड संहिता, 2023 की धारा 124 और ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच अभी भी जारी है।

क्या यह मामला सोशल मीडिया के खतरों की एक नई मिसाल है?

यह घटना सोशल मीडिया पर बढ़ते प्रभाव और भ्रामक प्रचारों की गंभीरता को उजागर करती है। क्या हम ऐसे नकली उत्पादों और दावा करने वालों से खुद को सुरक्षित रख पाएंगे? इस रहस्यमय मामले का अंत क्या होगा, यह देखना बाकी है।