राजस्थान की अजेमर जिले की कोर्ट ने 22 साल पुराने केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दरअसल 22 साल पहले एक एसपी को थप्पड़ मारने के मामले में तात्कालिक विधायक को 3 साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि इस घटना के बाद ही एमएलए को पार्टी से हटा दिया गया।

अजमेर (ajmer news). राजस्थान की अजमेर जिले की पीसीपीएनडीटी कोर्ट ने 22 साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आज के करीब 22 साल पहले एसपी के थप्पड़ मारने के मामले में तत्कालीन विधायक को 3 साल की सजा सुनाई है। हालांकि एसपी को थप्पड़ मारने के बाद विधायक को तत्काल ही निलंबित कर दिया गया था लेकिन फैसला आने में अब करीब 22 साल का समय लग गया...

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ये था पूरा मामला

दरअसल 30 जून 2001 को कलेक्ट्रेट परिसर अजमेर में जिला सतर्कता एवं जन अभियोग निराकरण समिति की बैठक चल रही थी। इस बैठक में कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। किसी बात को लेकर तत्कालीन एसपी आलोक त्रिपाठी और बाबूलाल सिंगारिया के बीच विवाद हुआ। फिर गुस्से गुस्से में ही विधायक बाबूलाल ले एसपी को चांटा जड़ दिया। इस दौरान वहीं पर मौजूद एडिशनल ग्रामीण एसपी वासुदेव भट्ट ने एमएलए ने रोकने की कोशिश की तो उन्होंने भट्ट की भी वर्दी फाड़ दी। ताज्जुब की बात तो यह है कि जिस दौरान यह पूरा घटनाक्रम हुआ इस दौरान सीएम अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री से। जो खुद एक कार्यक्रम में गए हुए थे।

न्याय मिलने में लग गए 22 साल

सीएम गहलोत ने मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए बाबूलाल को पार्टी से निष्कासित किया और फिर बाबूलाल के खिलाफ अजमेर के सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज हुआ। हालांकि अब एसपी त्रिपाठी एसीबी के महानिदेशक के पद से रिटायर हो चुके हैं। कोर्ट ने बाबूलाल को 3 साल की सजा के आदेश दिए हैं। हालांकि इसमें उन्हें तुरंत जमानत भी मिल सकती है इसके अलावा उन्हें एक लाख का जुर्माना भरना पड़ेगा। आपको बता दें कि 1998 में बाबूलाल ने पहली बार चुनाव लड़ा। साल 2013 में आखिरी बार एनसीपी के टिकट पर उन्होंने चुनाव तो लड़ा लेकिन जीत नहीं पाए और तब से वह राजनीति से दूर है।

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