चित्तौड़गढ़ में अफीम की खेती करने वाले किसानों पर नारकोटिक्स विभाग की कड़ी नज़र। CCTV कैमरों और जालों से घिरे खेतों में, फसल काटने के लिए भी विभाग की अनुमति ज़रूरी। नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई।

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ इलाके में एक अनोखी खेती हो रही है, जो न सिर्फ किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि इसमें नारकोटिक्स विभाग की कड़ी निगरानी भी है। यहां के किसान अफीम की खेती कर रहे हैं, जिसे वो अपनी मर्जी से काट भी नहीं सकते। यहां तक कि खेतों में सीसीटीवी कैमरे और बड़े जाल लगाकर फसल की सुरक्षा की जाती है।

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किसानों की सख्त निगरानी

अफीम की खेती राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में करीब 21 हजार किसानों द्वारा की जा रही है। इन किसानों को बुआई से लेकर फसल काटने तक सभी काम नारकोटिक्स विभाग की निगरानी में करने होते हैं। अफीम के पौधों पर निगरानी रखने के लिए खेतों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं और पक्षियों से बचने के लिए फसल पर बड़े जाल भी लगाए जाते हैं। इन किसानों को अपनी फसल काटने के लिए नारकोटिक्स विभाग की अनुमति का इंतजार करना होता है, और अगर प्राकृतिक आपदा आती है, तो भी फसल को नष्ट करने की अनुमति सिर्फ विभाग से ही मिल सकती है।

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नारकोटिक्स विभाग की सख्त कार्रवाई

यदि किसान विभाग के निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसका पट्टा खारिज कर दिया जाता है और उस पर कार्रवाई की जाती है। चित्तौड़गढ़ में नारकोटिक्स विभाग की 8-10 लोगों की टीम इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करती है। इसके अलावा, यदि किसी किसान ने निर्धारित क्षेत्र से ज्यादा अफीम की खेती की, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाती है। बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने पर किसानों को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

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