प्रमोशन और जिला अव्वल आने के बाद कलेक्टर टीना डाबी के सामने बाड़मेर में खुले बोरवेल की समस्या से निपटने की चुनौती। सीएम ऑफिस की निगरानी में बोरवेल बंद करने और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश।

बाड़मेर. नए साल में प्रमोशन और जिला अव्वल आने के बाद अब कलक्टर डाबी के सामने बड़ी चुनौती आ गई है। दरअसल बाड़मेर जिले में खुले बोरवेल से होने वाले हादसों को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिला कलेक्टर टीना डाबी ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार के निर्देशानुसार, अब जिले में खुले बोरवेल चिन्हित किए जाएंगे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इस अभियान पर खुद सीएम ऑफिस से नजर रखी जा रही है।

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टीना डाबी ने अफसरों को दिए यह निर्देश

कलोक्टर ने सभी उपखंड अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में खुले बोरवेल का सर्वेक्षण कर उनकी सूची तैयार करें। इन बोरवेल को तुरंत बंद करने या तारबंदी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही सूखे या अनुपयोगी बोरवेल को पाटने का निर्देश भी दिया गया है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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पोस्टर, बैनर और लाउडस्पीकर से होगा ऐलान

कलेक्टर डाबी ने कहा कि ग्राम पंचायतों से मिलने वाली रिपोर्ट्स का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा ताकि किसी भी खुले बोरवेल की जानकारी छूट न जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है जो रिपोर्ट्स का सत्यापन करेगी। उन्होनें जिले के अधिकारियों को कहा कि बच्चों और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विद्यालयों में प्रार्थना सभाओं के दौरान जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस अभियान के तहत बच्चों को खुले बोरवेल के खतरों के बारे में बताया जाएगा और उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाए। इसके अलावा गांवों में पोस्टर, बैनर और लाउडस्पीकर के माध्यम से भी जानकारी पहुंचाई जाएगी।

इस दर्दनाक घटना के बाद आया यह फैसला

उल्लेखनीय है कि जयपुर के नजदीक कोटपूतली इलाके में तीन साल की बच्ची चेतना सात सौ फीट गहरे बोरवेल में गिरी थी। उसे दस दिन बाद निकाला जा सका था। उसे निकालने के लिए करीब पांच करोड़ रुपए से भी ज्यादा का खर्च आया था, जो सरकार को वहन करना पड़ा था।

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