चित्तौड़गढ़ के सांवलिया जी मंदिर में धनतेरस पर भक्तों ने 25 लाख की चांदी की पालकी और रथ भेंट किया। गुजरात से आए इन भक्तों ने अपनी पहचान गुप्त रखी। यह भेंट देवउठनी ग्यारस पर ठाकुर जी के नगर भ्रमण में काम आएगी।

चित्तौड़गढ़. धनतेरस के शुभ अवसर पर श्री सांवलिया जी मंदिर में दो भक्तों ने मिलकर ठाकुर जी को एक विशेष भेंट दी है। इन भक्तों ने एक भव्य रथ और पालकी का निर्माण कराया, जिसमें चांदी का सुंदर वर्क किया गया है। इस रथ और पालकी का कुल वजन 460 किलो है, जिसमें 23 किलो चांदी का वर्क भी शामिल है। यह भेंट गुजरात से आए भक्तों द्वारा दी गई, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखी। इस रथ कीमत करीब 30 लाख से ज्यादा आंकी जा रही है।

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भक्त ने सुनार के हाथ पहुंचाई भगवान को पालकी

रथ और पालकी का निर्माण सुमेरपुर के एक सुनार ने किया है। भक्तों ने धनतेरस के पावन दिन ठाकुर जी को यह भेंट देने का निर्णय लिया, हालांकि वे व्यक्तिगत रूप से मंदिर नहीं आए। मंगलवार को, सुनार ने यह रथ और पालकी मंदिर पहुंचाई, जहां मंदिर मंडल के सदस्यों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

देवउठनी ग्यारस पर ठाकुर जी निकलेगी पालकी

मंदिर मंडल के सदस्य संजय मंडोवरा ने बताया कि मंदिर में पहले से एक बड़ा रथ मौजूद था, लेकिन छोटे रथ और पालकी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। यह विशेष रथ और पालकी दीपावली के बाद 12 नवंबर को देवउठनी ग्यारस पर ठाकुर जी के बाल विग्रह के नगर भ्रमण के लिए उपयोग में लाए जाएंगे। भक्तों की यह भेंट ठाकुर जी के प्रति उनके अटूट विश्वास को दर्शाती है।

रथ का वजन 380 किलो है, जिसमें 8 किलो चांदी

इस रथ और पालकी का निर्माण लकड़ी से किया गया है, जिसमें चांदी का वर्क अत्यंत आकर्षक तरीके से किया गया है। रथ का वजन 380 किलो है, जिसमें 8 किलो चांदी शामिल है, जबकि पालकी में 80 किलो लकड़ी के साथ 15 किलो चांदी का वर्क किया गया है। दोनों वस्तुओं में मीनाकारी का खूबसूरत काम भी किया गया है, जो उन्हें और भी आकर्षक बनाता है।

धनतेरस धन और समृद्धि का प्रतीक

भक्तों का कहना है कि उन्होंने धनतेरस का दिन इस भेंट के लिए खास तौर पर चुना है, क्योंकि यह दिन धन और समृद्धि का प्रतीक है। मंदिर के नंदकिशोर टेलर ने जानकारी देते हुए बताया कि भक्तों की इस भेंट से मंदिर को काफी सुविधा होगी और यह रथ तथा पालकी, ठाकुर जी के नगर भ्रमण के दौरान काम में ली जाएगी।