Drone Artificial Rain: जयपुर के रामगढ़ बांध पर ड्रोन से कृत्रिम बारिश का पहला ट्रायल होगा। इस नई तकनीक से सीमित क्षेत्र में बादल छिड़काव कर बारिश लाने का परीक्षण होगा, जिससे सूखे प्रभावित इलाकों में फसलों को राहत मिलेगी और खेती में सुधार होगा। 

Jaipur Ramgarh Dam Drone Artificial Rain : जयपुर के रामगढ़ बांध के आसमान में मंगलवार को एक अनोखा नज़ारा देखने को मिलेगा। यहां दोपहर बाद ड्रोन की मदद से कृत्रिम बारिश का पहला ट्रायल किया जाएगा। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा इस प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत करेंगे। दावा किया जा रहा है कि भारत में अब तक कृत्रिम बारिश केवल हवाई जहाज के जरिए कराई जाती रही है, लेकिन यह पहला मौका होगा जब छोटे दायरे में ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

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अमेरिकी व बेंगलुरु की कंपनी 60 टेस्ट करेगी

इस ट्रायल के लिए अमेरिका और बेंगलुरु की टेक्नोलॉजी कंपनी जेन एक्स एआई को जिम्मेदारी दी गई है, जो कृषि विभाग के साथ पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर काम कर रही है। योजना के तहत करीब 60 क्लाउड सीडिंग टेस्ट ड्राइव की जाएंगी, जिनका उद्देश्य सीमित क्षेत्र में बारिश लाने की क्षमता को परखना है। इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने के लिए जुलाई में ही सभी आवश्यक अनुमतियां ले ली गई थीं। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के साथ मौसम विभाग, जिला प्रशासन और DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) की मंजूरी शामिल है। पहले यह ट्रायल 31 जुलाई को होना था, लेकिन मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के चलते इसे टाल दिया गया था।

क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया से होगी बारिश

 क्लाउड सीडिंग तकनीक में बादलों में नमी मौजूद होने पर विशेष रसायन जैसे सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड या ड्राई आइस छोड़े जाते हैं। ये कण बादलों में जाकर जलकणों को आकर्षित करते हैं, जिससे वे भारी होकर बारिश के रूप में गिरते हैं। यह प्रक्रिया ड्रोन, हवाई जहाज या हेलिकॉप्टर से की जा सकती है।

राजस्थान को कैसे मिलेगा ड्रोन बारिश से फायदा 

राजस्थान में कई बार मानसून के दौरान बादल तो आते हैं, लेकिन नमी की कमी या अन्य कारणों से बारिश नहीं होती। यदि ड्रोन-आधारित क्लाउड सीडिंग सफल होती है, तो आने वाले समय में सीमित इलाकों में फसलों को सूखे से बचाने के लिए यह तकनीक अपनाई जा सकती है। इससे विशेष रूप से उन क्षेत्रों को राहत मिलेगी, जहां पानी की कमी के कारण खेती पर संकट खड़ा हो जाता है।

जयपुर के इस ट्रायल पर पूरे देश की निगाहें 

पिछले वर्षों में प्लेन से क्लाउड सीडिंग के प्रयास मिश्रित परिणाम दे चुके हैं। उदाहरण के तौर पर, चित्तौड़गढ़ के भैंसुंदा बांध पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर प्रयोग किया गया था, लेकिन अपेक्षित बारिश नहीं हुई। इस वजह से सभी की निगाहें अब जयपुर के इस ट्रायल पर टिकी हैं। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो यह न केवल राजस्थान बल्कि देश के अन्य सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक नई उम्मीद बन सकता है।