राजस्थान में शीतलहर और पाले से फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। 5 जनवरी तक घूंआ, छिड़काव और सिंचाई जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

करोड़ों किसानों के लिए सरकार की एडवाइजरी: 5 जनवरी तक करना होगा यह खास काम...

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

पाले से फसलों को बचाने के लिए किसानों के लिए कृषि विभाग की विशेष सलाह

जयपुर. राजस्थान में शीतलहर और पाले की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए जरूरी एडवाइजरी जारी की है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 22 दिसंबर से 5 जनवरी तक ठंड में बढ़ोतरी और हल्की बारिश के आसार हैं। इस दौरान टमाटर, मिर्च, बैंगन, धनिया, मटर, चना, सरसों और गेहूं जैसी फसलों को पाले से भारी नुकसान हो सकता है। किसानों को फसलों को बचाने के लिए निम्न उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

पाले से बचाव के लिए उपाय

घूंआ करना: जिस रात पाले की संभावना हो, उस रात खेत के किनारे पर घास-फूस और कचरा जलाकर घूंआ करें। इससे वातावरण में गर्मी बनी रहती है और फसलों को ठंड से बचाया जा सकता है।

गंधक और थायो यूरिया का छिड़काव: गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिशत घोल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) या थायो यूरिया (500 पीपीएम) का छिड़काव 15-15 दिन के अंतराल पर करें। यह पाले के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।

हल्की सिंचाई: पाले की संभावना होने पर खेत में हल्की सिंचाई करें। यह जमीन की नमी बनाए रखता है और तापमान को 0.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ाने में मदद करता है।

फसलों को ढकना: सब्जियों और अन्य फसलों को पॉलिथीन, भूसे या टाट से ढक दें। नर्सरी या सीमित क्षेत्र में उगाई गई फसलों को खासतौर पर ढककर रखें। ठंडी हवा से बचाव के लिए खेतों के किनारे वायुरोधी टाटियां लगाएं।

वायुरोधक पेड़ लगाना: खेत की मेड़ों पर शहतूत, शीशम, खेजड़ी और बबूल जैसे पेड़ लगाएं, ताकि ठंडी हवाओं से फसलों को बचाया जा सके।

विशेष ध्यान दें

किसान दिन में फसलों को ढके गए सामग्री को हटा दें ताकि पौधों को सूर्य की किरणें मिल सकें। यदि पाले का प्रभाव अधिक हो, तो सिंचाई और छिड़काव की प्रक्रिया समय पर करें।

कृषि विभाग का कहना है कि इन उपायों को अपनाकर किसान अपनी फसलों को पाले से बचा सकते हैं और उत्पादन को सुरक्षित रख सकते हैं।