कोटा के सरकारी अस्पतालों में सी-सेक्शन के बाद गंभीर इन्फेक्शन से 4 महिलाओं की मौत हो गई। इस घटना से मेडिकल लापरवाही पर सवाल उठे हैं। सरकार ने उच्च-स्तरीय जांच शुरू की है और कई स्टाफ सदस्यों को निलंबित कर दिया है।

कोटा: राजस्थान के कोटा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यहां सी-सेक्शन ऑपरेशन के बाद गंभीर इन्फेक्शन फैलने से अब तक चार महिलाओं की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद शहर में गुस्सा है, लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकारी अस्पतालों में मेडिकल लापरवाही के आरोपों को लेकर कई जांचें शुरू हो गई हैं।

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ये मौतें न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (NMCH) और जेके लोन हॉस्पिटल में हुई हैं। यहां कई महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी के बाद गंभीर दिक्कतें होने लगीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्जरी के कुछ ही घंटों के अंदर कई मरीजों का ब्लड प्रेशर अचानक गिरने लगा, किडनी से जुड़ी परेशानियां हुईं, पेशाब रुक गया और गंभीर इन्फेक्शन हो गया।

यह मामला तब और गरमा गया जब इन्फेक्शन कंट्रोल में लापरवाही और इलाज में कोताही के आरोप सामने आए। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट में तो यह भी दावा किया गया है कि ऑपरेशन के दौरान निकाली गई बच्चेदानी (uterus) को भी सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया। कथित तौर पर एक निकाली हुई बच्चेदानी एक डिब्बे के अंदर ही पड़ी मिली। इस दावे ने अस्पतालों में साफ-सफाई के स्टैंडर्ड और सर्जिकल प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ितों के परिवारों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप लगाया है। एक मामले में, रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि एक महिला घंटों तक पेट में तेज दर्द और पेशाब की समस्या से तड़पती रही, लेकिन उसकी हालत गंभीर होने तक उस पर ध्यान नहीं दिया गया। एक अन्य परिवार ने दावा किया कि हालत बिगड़ने के बावजूद डॉक्टरों ने मरीजों को समय पर बड़े अस्पतालों में शिफ्ट नहीं किया।

राजस्थान सरकार ने अब इस मामले में कई मेडिकल स्टाफ सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। कथित लापरवाही को लेकर मंगलवार को दो और डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया, जबकि अस्पताल के सीनियर एडमिनिस्ट्रेटर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

इन्फेक्शन का असली कारण पता लगाने के लिए एक हाई-लेवल जांच चल रही है, जिसमें AIIMS दिल्ली के एक्सपर्ट्स और राज्य के सीनियर स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं। अधिकारी स्टरलाइजेशन सिस्टम, ऑपरेशन थिएटर के प्रोटोकॉल, दवाओं के डिस्ट्रिब्यूशन और ऑपरेशन के बाद की निगरानी प्रक्रियाओं की जांच कर रहे हैं।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इन्फेक्शन का असल सोर्स अभी तक साफ नहीं हो पाया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि शायद दवाएं इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि ऐसी ही दवाएं दूसरी जगहों पर भी इस्तेमाल की गईं और वहां ऐसी कोई दिक्कत नहीं आई। जांचकर्ता अब अस्पताल के इन्फेक्शन-कंट्रोल सिस्टम में संभावित चूकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस दुखद घटना ने राजस्थान में मैटरनल हेल्थकेयर सुविधाओं पर बहस तेज कर दी है। शोक में डूबे परिवार अस्पताल प्रशासन से सख्त कार्रवाई और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। कई प्रभावित महिलाएं अभी भी गंभीर हालत में हैं और डॉक्टर उन्हें स्थिर करने की कोशिश में जुटे हैं।