13 मई 2008 को जयपुर में हुए बम धमाकों में पकड़े गए चारों आरोपियों लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पहले जहां स्थानीय अदालन ने इन्हें फांसी की सजा सुनाई थी, अब उन्हें बरी कर दिया है। वहीं पुलिस को जज ने तगड़ी फटकार भी लगाई है।

जयपुर, खबर राजधानी जयपुर से है और राजस्थान की सबसे बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की चिंता इस खबर ने बढ़ा दी है। उन्हें तगड़ा झटका लगा है। चुनावी साल में यह झटका उन्हें परेशानी दे सकता है। पूरा मामला 13 मई 2008 को जयपुर में हुए बम धमाकों से जुड़ा हुआ है ।

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इस केस में 70 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत

दरअसल 13 मई 2008 को जब जयपुर में 8 बम धमाके हुए । इसमें 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और करीब 200 लोग गंभीर घायल हो गए । उन्हें आजीवन का दर्द मिला। उस समय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इसे इंडियन मुजाहिद्दीन की ओर से कराया गया आतंकी हमला बताया और इसी दिशा में कार्रवाई की जाती रही । राजस्थान पुलिस की एजेंसी एटीएस ने यह कार्यवाही की ।

चारों आरोपियों को कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा

एटीएस ने सैफुर रहमान , सरवर आजमी, सैफ और सलमान को गिरफ्तार किया था। इनके एक और साथी शाबाद को भी पकड़ा गया था। सभी को इंडियन मुजाहिद्दीन का स्लीपर सेल बताया गया था। उसके बाद इन पर केस चलाया गया कई साल तक ट्रायल और गवाहों के बयानों के बाद 20 दिसंबर 2019 को निचली कोर्ट ने चारों को फांसी की सजा सुनाई थी । हालांकि एक अन्य को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।

अब चारों को कर दिया गया बरी....

फांसी की सजा मुकर्रर होने के बाद सैफ , सरवर समेत अन्य दोनों संदिग्धों ने इस बारे में राजस्थान हाई कोर्ट में अपील की थी। अलग-अलग विषयों पर 28 अप्रैल याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई थी । उसमें फांसी की सजा को लेकर भी अपील की गई थी। राजस्थान हाईकोर्ट में 48 दिन तक यह सुनवाई चली और उसके बाद आज हाईकोर्ट ने इन 28 अपील में से कई अपील पर फैसला सुनाया। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है चारों आरोपियों को बरी कर दिया गया है ।

पूरे मामले में कड़ियां जोड़ने में असफल रही राजस्थान पुलिस

हाईकोर्ट की खंडपीठ में जज पंकज भंडारी और समीर जैन ने पुलिस के खिलाफ तगड़ी टिप्पणी की है । जजों ने कहा है कि राजस्थान पुलिस इस पूरे मामले में कड़ियां जोड़ने में असफल रही है। उन्होंने इतनी जबरदस्त लापरवाही बरती है जिसे माफ नहीं किया जा सकता है । दोनों जजों ने इस पूरे मामले में जांच पड़ताल करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए डीजीपी उमेश मिश्रा को पत्र लिखा है और उनसे कार्रवाई की रिपोर्ट भी जल्द से जल्द मांगी है। चारों आरोपियों में एक सलमान नाम के आरोपी का मामला किशोर बोर्ड को भेजा गया है। कोर्ट ने इस पूरे मामले में पुलिस जांच की बैंड बजा दी । जजों का कहना है कि पुलिस ने इतने संवेदनशील मामले में बेहद लापरवाही बढ़ती है।।

पहले हुई तारीफ-अब पुलिस को लगा तगड़ा झटका

उल्लेखनीय है कि चारों को फांसी की सजा सुनाए जाने पर राजस्थान पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही थी , लेकिन पता चला चारों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर और जानकारियां आना अभी बाकी है।