राजस्थान की रहने वाली अर्चना में भारत का नाम दुनिया भर में रौशन किया है। उसने कजाकिस्तान में आयोजित वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड इंकलाइनल बेंच प्रेस चैंपियनशिप में मेडल जीता है। हालांकि, उसका सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है।

राजस्थान की खबरें। जिंदगी में कोई भी व्यक्ति सफल होता है तो उसके पीछे संघर्ष की एक बड़ी कहानी होती है। कुछ ऐसी ही कहानी राजस्थान के सीकर जिले के रायपुर गांव की रहने वाली अर्चना की है। जो हाल ही में कजाकिस्तान में आयोजित 11वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड इंकलाइनल बेंच प्रेस चैंपियनशिप में दो मेडल जीत कर आई है।

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अर्चना ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 80 प्लस किलो कैटेगरी में 292.5 किलो और बेंच में 107.05 किलो उठाकर सिल्वर मेडल जीता है। अर्चना बताती है-"आज भले ही उसके मेडल जीतने पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लेकिन जब वह तैयारी कर रही थी तो उसके पास लिफ्टिंग के सामान खरीदने तक के पैसे नहीं थे।"

अर्चना ने नहीं मानी हार

अर्चना ने किसी भी कदम पर हार नहीं मानी। इलाके के कई लोगों ने उसकी मदद करनी शुरू कर दी। इसके बाद अर्चना ने रेगुलर प्रैक्टिस करना शुरू किया और आज नतीजा सामने है कि वह मेडल जीत चुकी है। अर्चना के परिवार वालों की बात करें तो पिता पत्थरों की खदान में काम करके घर का गुजारा करते हैं। तीन भाई बहन हैं। हालांकि, अभी तक इनका मकान भी कच्चा ही है।

अर्चना ने कई अवार्ड किए अपने नाम

पहले तो अर्चना ने सीकर में कोच दुर्जन सिंह के निर्देशन में प्रैक्टिस की और फिर जयपुर में कोच उदयभान ने ट्रेंड किया। अर्चना बताती है-"अब तक वह स्टेट और नेशनल लेवल पर कई मेडल जीत चुकी है। राजस्थान यूनिवर्सिटी में m.com कर रही है। 2017 से पावर लिफ्टिंग करती हुई आ रही है। दो अंतरराष्ट्रीय मेडल के साथ ही स्टेट लेवल पर वेट लिफ्टिंग में एक गोल्ड, चार सिल्वर,दो ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं। वेटलिफ्टिंग में एक गोल्ड, चार सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया है।"

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